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देहरादून के राजपुर रोड पर स्थित नीट की तैयारी कराने वाला कोचिंग संस्थान।

देहरादून में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (UG) 2026 रद्द होने के बाद छात्रों में भारी निराशा है। पेपर लीक के आरोपों के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को हुई परीक्षा मंगलवार को रद्द कर दी। केंद्र सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी है। इस फैस

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राजपुर रोड स्थित कोचिंग संस्थानों के बाहर मंगलवार को छात्रों के चेहरों पर गुस्सा और मायूसी साफ दिखाई दी। कई छात्र ऐसे हैं जिन्होंने दो-दो साल ड्रॉप लेकर तैयारी की थी। अब दोबारा परीक्षा की खबर ने उनकी मानसिक परेशानी बढ़ा दी है। छात्रों का कहना है कि अगर पेपर लीक हुआ था तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन मेहनत करने वाले छात्रों को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए।

दैनिक भास्कर एप ने देहरादून में नीट की तैयारी कर रहे छात्रों से बात की। छात्रों ने कहा कि लगातार दूसरे साल NEET विवादों में आने से परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर हो रहा है। कई छात्रों ने कहा कि जिनका पेपर अच्छा हुआ था, वे अब सबसे ज्यादा तनाव में हैं क्योंकि उन्हें दोबारा उसी स्तर की तैयारी करनी पड़ेगी।

दो साल की मेहनत फिर से दांव पर लगी

देहरादून में पढ़ाई कर रहे छात्र निखिल ने कहा कि परीक्षा रद्द होने से सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों का हुआ है जिन्होंने सालों मेहनत की थी। उन्होंने कहा-

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कई बच्चों ने सोशल लाइफ छोड़कर सिर्फ पढ़ाई पर फोकस किया था। जिनका पेपर अच्छा गया था, वे अब डिप्रेशन में हैं। सरकार को पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

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इसी दौरान एक ड्रॉपर छात्र अरीब ने बताया कि वह 11वीं क्लास से ही ऑनलाइन तैयारी कर रहा था और अब ड्रॉप लेकर परीक्षा दी थी। उसने कहा, “पूरी मेहनत से पेपर दिया था, लेकिन अब दोबारा वही तैयारी करनी पड़ेगी। यह सिर्फ परीक्षा नहीं होती, बच्चों के करियर और परिवार की उम्मीदें भी इससे जुड़ी होती हैं।”

कोचिंग हब होने से उत्तराखंड के छात्र ज्यादा प्रभावित

देहरादून उत्तराखंड में मेडिकल और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां राज्य के अलग-अलग जिलों के अलावा हिमाचल, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से भी छात्र पढ़ने आते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने का असर बड़ी संख्या में छात्रों पर पड़ा है।

एक छात्र ने बताया कि उसने इसी साल कोचिंग जॉइन की थी और उम्मीद थी कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी। उसने कहा-

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पिछले कुछ सालों से लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। अब दोबारा तैयारी और परीक्षा का स्ट्रेस झेलना पड़ेगा।

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छात्रों का कहना है कि परीक्षा एजेंसियों को सख्त SOPs लागू करने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों और छात्रों को मानसिक दबाव का सामना न करना पड़े।

300 सवालों के ‘क्वेश्चन बैंक’ से 150 सवाल मैच होने का दावा

जांच एजेंसियों के मुताबिक इस बार पेपर लीक बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया। कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से ज्यादा सवाल थे। सभी सवाल हाथ से लिखे गए थे और उनकी हैंडराइटिंग भी एक जैसी बताई जा रही है।

दावा है कि इनमें से 150 सवाल हूबहू NEET परीक्षा में आए। नीट में कुल 180 सवाल हल करने होते हैं और प्रत्येक सवाल 4 अंक का होता है। इस हिसाब से करीब 600 नंबर के सवाल सीधे इसी कथित क्वेश्चन बैंक से जुड़े बताए जा रहे हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि यह क्वेश्चन बैंक वॉट्सएप के जरिए कई छात्रों तक पहुंचा। इसके तार राजस्थान, केरल, बिहार और महाराष्ट्र तक जुड़ रहे हैं। राजस्थान SOG पहले ही कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

‘क्वेश्चन बैंक’ हाथ से लिखे गए हैं और इनकी हैंडराइटिंग भी एक ही है।

‘क्वेश्चन बैंक’ हाथ से लिखे गए हैं और इनकी हैंडराइटिंग भी एक ही है।

2024 में भी विवादों में रही थी NEET परीक्षा

NEET UG परीक्षा पिछले साल भी विवादों में रही थी। 5 मई 2024 को हुई परीक्षा के बाद बिहार और झारखंड में पेपर लीक के सबूत मिले थे। मामले में कई गिरफ्तारियां भी हुई थीं।

हालांकि, तब सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था। सिर्फ 1539 छात्रों की दोबारा परीक्षा हुई थी। उस समय 67 छात्रों को 720 में 720 अंक मिलने और एक ही केंद्र से कई टॉपर्स आने पर भी बड़ा विवाद खड़ा हुआ था।

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