जिले के मुस्तफाबाद करीबधाम की रहने वाली एडवोकेट कल्पना तिवारी बताती हैं कि पीपल जैसे नाजुक पत्ते पर कलाकृति बनाना बिल्कुल आसान नहीं होता. जरा सी गलती से पूरा पत्ता खराब हो सकता है और घंटों की मेहनत बेकार चली जाती है. एक चित्र बनाने में करीब डेढ़ से दो घंटे, जबकि कई बार इससे भी ज्यादा समय लग जाता है. इसके लिए बेहद धैर्य, एकाग्रता और बारीकी से काम करना पड़ता है.
लखीमपुर खीरीः अक्सर लोग पेड़ों के पत्तों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की रहने वाली कल्पना तिवारी ने इन्हीं पत्तों को अपनी अनोखी कला से खास पहचान दिला दी है. कल्पना तिवारी पीपल, आम और मदार के पत्तों पर देश की महान हस्तियों की तस्वीरें उकेरकर लोगों को हैरान कर रही हैं. उनके द्वारा बनाए गए नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी बाजपेई के चित्र लोगों को काफी आकर्षित करते हैं.
बारीक काम होता है ये काम
खीरी जिले के मुस्तफाबाद करीबधाम की रहने वाली एडवोकेट कल्पना तिवारी बताती हैं कि पीपल जैसे नाजुक पत्ते पर कलाकृति बनाना बिल्कुल आसान नहीं होता. जरा सी गलती से पूरा पत्ता खराब हो सकता है और घंटों की मेहनत बेकार चली जाती है. एक चित्र बनाने में करीब डेढ़ से दो घंटे, जबकि कई बार इससे भी ज्यादा समय लग जाता है. इसके लिए बेहद धैर्य, एकाग्रता और बारीकी से काम करना पड़ता है. कल्पना सर्जिकल ब्लेड की मदद से पत्तों पर बेहद सावधानी से कटिंग करते हुए तस्वीरों को उकेरती हैं. उनकी बनाई गई लीफ आर्ट में इतनी महीन कारीगरी दिखाई देती है कि देखने वाले दंग रह जाते हैं. यही वजह है कि अब दूर-दूर से लोग उनकी कला को देखने और सराहने के लिए पहुंचते हैं.
कोरोना काल के खाली समय ने बदली जिंदगी
कल्पना तिवारी ने बताया कि वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान जब लोग घरों में थे, तब उनके मन में कुछ अलग करने का विचार आया. बचपन से ही उन्हें चित्रकारी और रचनात्मक कार्यों का शौक था. इसी शौक को नया रूप देते हुए उन्होंने पत्तों पर चित्र उकेरने की शुरुआत की. शुरुआत में यह सिर्फ एक प्रयोग था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी कला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई. आज कल्पना तिवारी अपनी अनोखी लीफ आर्ट की वजह से पूरे लखीमपुर खीरी जिले और आसपास के क्षेत्रों में पहचान बना चुकी हैं. उनकी यह कला न केवल पर्यावरण से जुड़ाव का संदेश देती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर हुनर और लगन हो तो साधारण चीजों को भी खास बनाया जा सकता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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