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Kanpur News: सालों की कड़ी मेहनत के बाद छात्रों ने नीट यूजीसी की परीक्षा दी थी, लेकिन अब पेपर लीक की खबर और फिर एग्जाम कैंसिल होने को लेकर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने कहा कि हमारी सालों की मेहनत तो बर्बाद हो गई.

कानपुर: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG रद्द होने के बाद कानपुर के छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. छात्रों का कहना है कि वे कई-कई साल तक दिन-रात मेहनत करके इस परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं की वजह से उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है.

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से 3 मई 2026 को देशभर में NEET-UG परीक्षा कराई गई थी. परीक्षा में लाखों छात्र शामिल हुए थे. इसके बाद पेपर लीक और गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने लगीं. जांच के बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया, जिससे छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई.

कई सालों की मेहनत
छात्रों का कहना है कि मेडिकल की तैयारी सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि कई सालों की तपस्या होती है. स्कूल खत्म होने के बाद छात्र कोचिंग, टेस्ट सीरीज और घंटों की पढ़ाई में खुद को झोंक देते हैं. कई छात्र एक-दो साल ड्रॉप लेकर सिर्फ इसी उम्मीद में तैयारी करते हैं कि इस बार उन्हें अच्छा मेडिकल कॉलेज मिल जाएगा, लेकिन परीक्षा रद्द होने से उनका आत्मविश्वास टूट जाता है.

पेपर अच्छा गया था, अब फिर से वही तनाव
कानपुर की छात्रा अंशिका ने बताया कि इस बार उनका पेपर काफी अच्छा गया था और उन्हें उम्मीद थी कि अच्छे नंबर आएंगे, लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर सुनते ही उन्हें बड़ा झटका लगा. उन्होंने कहा कि जो छात्र ईमानदारी से मेहनत करते हैं, सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं का होता है. अंशिका ने कहा कि हर छात्र की मानसिक और शारीरिक क्षमता की भी एक सीमा होती है. लगातार कई साल तक सिर्फ पढ़ाई, टेस्ट और प्रतियोगिता के दबाव में रहना आसान नहीं होता है. ऐसे में परीक्षा दोबारा होने की खबर छात्रों को फिर उसी तनाव में धकेल देती है.

‘छात्र अपनी पूरी जिंदगी रोक देते हैं’
कानपुर की छात्रा सौम्या ने बताया कि NEET जैसे एग्जाम की तैयारी में छात्र अपनी पूरी जिंदगी रोक देते हैं. दोस्तों से दूरी, सोशल लाइफ खत्म और हर दिन सिर्फ किताबों के बीच गुजरता है. परीक्षा के बाद जब थोड़ी राहत मिलती है, तभी पेपर रद्द होने जैसी खबर सामने आ जाती है. उन्होंने कहा कि कई छात्रों के लिए यह आखिरी मौका होता है. कुछ छात्र उम्र सीमा और पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से ज्यादा साल तक तैयारी नहीं कर पाते हैं. ऐसे में परीक्षा रद्द होना उनके सपनों पर सीधा असर डालता है.

‘सिस्टम पर भरोसा कमजोर हो रहा’
छात्रों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं से उनका सिस्टम पर भरोसा कमजोर हो रहा है. उनका कहना है कि मेहनत करने वाले लाखों छात्रों के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए. छात्रों ने मांग की है कि परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए, ताकि ईमानदारी से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को बार-बार परेशानी का सामना न करना पड़े.

About the Author

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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