पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने विवादित डॉक्यूमेंट्री ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ की रिलीज को मंजूरी दे दी है. हालांकि, कोर्ट ने एक बड़ी शर्त रखते हुए इसके नाम से लॉरेंस और बिश्नोई शब्द हटाने का आदेश दिया है. अब मेकर्स को नए नामों की सूची अदालत में पेश करनी होगी. दिलचस्प बात यह है कि कोर्ट ने टाइटल से पंजाब शब्द हटाने की सरकारी मांग को फिलहाल ठुकरा दिया है. इस मामले पर अंतिम फैसला आज होने वाली अगली सुनवाई में आएगा.
विवादों में है लॉरेंस ऑफ पंजाब डॉक्यूमेंट्री.
नई दिल्ली. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री लॉरेंस ऑफ पंजाब के मेकर्स को एक बड़ी राहत दी है. अदालत ने इस डॉक्यूमेंट्री को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज करने की हरी झंडी दे दी है, लेकिन इसके साथ ही एक सख्त शर्त भी जोड़ दी है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि फिल्म को उसके मौजूदा नाम के साथ रिलीज नहीं किया जा सकता.
हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, डॉक्यूमेंट्री के नए नाम में लॉरेंस और बिश्नोई जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. अब निर्माताओं को संभावित नए नामों की एक लिस्ट तैयार कर अदालत के सामने पेश करनी होगी, जिसके बाद कोर्ट की मंजूरी मिलने पर ही इसे रिलीज किया जा सकेगा.
आज सुनवाई में होगा नाम पर फैसला
रोचक बात यह है कि सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने फिल्म के टाइटल से पंजाब शब्द हटाने की भी मांग की थी, लेकिन फिलहाल अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया है. सरकार का तर्क था कि इससे राज्य की छवि पर नकारात्मक असर पड़ता है. हालांकि, यह मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है. इस पूरे विवाद और नाम के फाइनल अप्रूवल पर आज दोपहर बाद एक बार फिर सुनवाई होनी है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं.
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