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नई दिल्ली30 मिनट पहले

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केंद्र सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि नया विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G, 1 जुलाई से पूरे देश में लागू होगा। इसके साथ ही महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लोयमेंट एक्ट (MGNREGA) को खत्म कर दिया जाएगा।

ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, यह नया कानून सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि इस बदलाव से मजदूरों के काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ट्रांजिशन पूरी तरह बिना रुकावट के होगा और किसी को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा।

मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि 30 जून तक मनरेगा के तहत जो भी काम चल रहे होंगे, उन्हें नए सिस्टम में उसी तरह जारी रखा जाएगा। यानी किसी भी प्रोजेक्ट को बीच में नहीं रोका जाएगा।

इसी के साथ, जिन मजदूरों के मनरेगा जॉब कार्ड e-KYC से वेरिफाइड हैं, वे तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते।

जिनके e-KYC बाकी, उनको भी काम मिलेगा

सरकार ने यह भी साफ किया है कि जिन मजदूरों का e-KYC अभी बाकी है, उन्हें भी काम से नहीं रोका जाएगा। जिनके पास जॉब कार्ड नहीं है, उनका रजिस्ट्रेशन ग्राम पंचायत स्तर पर पहले की तरह जारी रहेगा।

मजदूरी भुगतान, शिकायत निवारण, फंड आवंटन और ट्रांजिशन से जुड़े नियमों का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा है कि इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चर्चा के बाद जल्द सार्वजनिक किया जाएगा।

सरकार ने ग्राम पंचायतों को ग्रामीण बदलाव का “केंद्रीय स्तंभ” बताया है। मंत्रालय के मुताबिक, नया कानून गांवों में रोजगार बढ़ाने, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में मदद करेगा।

नए कानून से ज्यादा काम मिलेगा

सरकार ने कहा कि नए कानून में हर ग्रामीण परिवार को अब साल में 125 दिन काम देने की गारंटी होगी, जो पहले 100 दिन थी। इससे गांवों में रहने वाले परिवारों को ज्यादा काम मिलेगा और उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।

कानून की धारा 22 के तहत इस योजना के खर्च को केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर वहन करेंगी। सामान्य राज्यों में खर्च का बंटवारा 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य के बीच होगा।

वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों- जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत खर्च उठाएगी।

धारा 6 के अनुसार, राज्य सरकारें खेती के व्यस्त समय, जैसे बुवाई और कटाई के दौरान, साल में अधिकतम 60 दिनों तक इस योजना के तहत मिलने वाले काम को नियंत्रित कर सकेंगी।

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