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सुल्तानपुर का इतिहास काफी प्राचीन रहा है. वर्तमान सुल्तानपुर शहर पहले शहर नहीं हुआ करता था, बल्कि यह एक गांव था जबकि सुल्तानपुर का मुख्य शहर गोमती नदी के उत्तर दिशा में बसा था, जिसे आज कस्बा कहा जाता है. उस स्थल पर भरों के किलों से संबंधित साक्ष्य मिलते हैं और इसके साथ ही जिनाती मस्जिद और प्राचीन इमामबाड़ा भी मिलता है. जबकि वर्तमान सुल्तानपुर शहर गिरगिट के नाम से जाना जाता था.

सुल्तानपुरः उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला अपने नाम को लेकर कई बार चर्चाओं में रहा है. प्राचीन काल में इसका नाम केसिपुत्र, कुशभवन पुर और केशपुर हुआ करता था, लेकिन अगर सुल्तानपुर शहर की बात की जाए तो प्राचीन सुल्तानपुर गोमती नदी के उत्तर दिशा में मौजूद था. वर्तमान में सुल्तानपुर जिस जगह पर बसा है उसे गिरगिट कहा जाता था. जिसका जिक्र इतिहासकारों की पुस्तकों में भी है.

अब सुल्तानपुर के दक्षिण दिशा में स्थित सुल्तानपुर शहर के पुराने स्थान के नाम गिरगिट को लेकर कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलते हैं लेकिन जब सुल्तानपुर शहर गोमती नदी के दक्षिण दिशा में अस्तित्व में आया तो इसे गिरगिट ग्राम कहा जाता था.

सुल्तानपुर का रहा है प्राचीन इतिहास

सुल्तानपुर जिले के वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि सुल्तानपुर का इतिहास काफी प्राचीन रहा है. वर्तमान सुल्तानपुर शहर पहले शहर नहीं हुआ करता था, बल्कि यह एक गांव था जबकि सुल्तानपुर का मुख्य शहर गोमती नदी के उत्तर दिशा में बसा था, जिसे आज कस्बा कहा जाता है. उस स्थल पर भरों के किलों से संबंधित साक्ष्य मिलते हैं और इसके साथ ही जिनाती मस्जिद और प्राचीन इमामबाड़ा भी मिलता है. जबकि वर्तमान सुल्तानपुर शहर गिरगिट के नाम से जाना जाता था. यानी कि जहां पर आज सुल्तानपुर शहर स्थित है इसे गिरगिट ग्राम कहा जाता था.

गोमती नदी के दक्षिण स्थित है गिरगिट ग्राम

इतिहासकार व लेखक राजेश्वर सिंह अपनी किताब सुल्तानपुर इतिहास की झलक में लिखते हैं कि 1858 के बाद सुल्तानपुर में शांति की स्थापना की गई और इसके बाद सुल्तानपुर नगर को गोमती नदी के दक्षिण स्थित गिरगिट ग्राम में बसाया गया और यहां के पहले डिप्टी कमिश्नर पारकींस बनाए गए. उसे समय नगर का भू चित्र भी बनाया गया सन 1858 से 1860 ईस्वी में द्वितीय सरकारी बंदोबस्त प्रारंभ हुआ. जिस भूमि और उससे मिलने वाले राजस्व की व्यवस्था ब्रिटिश शासन के दिशा निर्देशों के अनुसार की जाए लेकिन यह व्यवस्था तालुकेदारी तक ही सीमित थी. 1858 से 59 ई के बाद इस जिले में ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण घटना नहीं हुई. हालांकि जिले का भौगोलिक दृष्टि से पुनर्गठन जरूर हुआ. इन बातों का जिक्र अवध गजेटियर में भी किया गया है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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