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दिल्ली के विवेक विहार इलाके में शनिवार देर रात लगी भीषण आग ने एक पूरी इमारत को श्मशान में बदल दिया. इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए. आग इतनी भयावह थी कि कई लोग जान बचाने के लिए भागते-भागते सीढ़ियों तक पहुंचे, लेकिन बाहर निकलने से पहले ही दम तोड़ दिया.

दमकल विभाग को आग लगने की सूचना तड़के करीब 3:47 बजे मिली. जब तक राहत टीमें मौके पर पहुंचीं, तब तक आग दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल को अपनी चपेट में ले चुकी थी. मौके पर पहुंचे पुलिस, दमकल और आपदा प्रबंधन की टीमों ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया.

सीढ़ियों पर मिलीं लाशें, मां-बच्चे की दिल दहला देने वाली तस्वीर

स्थानीय निगम पार्षद पंकज लूथरा के मुताबिक, दूसरे फ्लोर पर ही 5 लोगों की मौत हो गई. तीसरे फ्लोर पर एक शव मिला, जबकि ऊपर के फ्लोर से 3 और शव बरामद किए गए. कुछ शव सीढ़ियों पर पड़े मिले, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि लोग जान बचाने के लिए भाग रहे थे, लेकिन बाहर निकलने का रास्ता बंद होने के कारण फंस गए. एक दृश्य ऐसा भी सामने आया, जिसमें एक मां अपने छोटे बच्चे को सीने से लगाए हुए मृत पाई गई… यह तस्वीर पूरे हादसे की भयावहता को बयां कर रही है.

जन्मदिन से लौटे परिवार की खत्म हो गई दुनिया

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस हादसे का शिकार हुआ परिवार जैन संप्रदाय से ताल्लुक रखता था. वे देर रात करीब 12 बजे जन्मदिन समारोह से लौटकर घर आए थे. परिवार के पांच सदस्य पति-पत्नी, माता-पिता और एक छोटा बच्चा एक ही फ्लोर पर मौजूद थे और आग की चपेट में आ गए. आग इतनी तेज थी कि कई शव बुरी तरह जल गए, जिससे उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो गया है.

दिल्ली पुलिस के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 10 से 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि कुछ को मामूली चोटों के साथ गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

शॉर्ट सर्किट से एसी ब्लास्ट की आशंका

प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट की वजह से एसी में ब्लास्ट बताई जा रही है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सटीक कारण विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा. शाहदरा के डीसीपी आरपी मीणा के मुताबिक, आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन इमारत के ऊपरी हिस्से में अभी भी धुआं भरा हुआ है और सर्च ऑपरेशन जारी है.

इस आग को बुझाने के लिए दमकल विभाग की 12 गाड़ियों को लगाया गया. इसके अलावा डीडीएमए, ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें भी मौके पर मौजूद रहीं. यह हादसा राजधानी में सुरक्षा इंतजामों और बिल्डिंग सेफ्टी पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है. एक पल में कई परिवार उजड़ गए और पीछे छोड़ गए सिर्फ राख, सन्नाटा और अपनों को खोने का दर्द.

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