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Kaushambi history: कौशाम्बी जिले का कड़ा कस्बा एक ऐसा ऐतिहासिक स्थान, जिसकी पहचान सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि व्यापारिक समृद्धि से भी जुड़ी रही है. कहा जाता है कि दिल्ली सल्तनत के शासक अलाउद्दीन खिलजी के समय मे कड़ा में 52 मंडियां और 53 बाजार सजते थे. यह सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि व्यापार का एक बड़ा केंद्र हुआ करता था. प्रदेश के अलग-अलग जिलों से व्यापारी यहां आते थे.

कौशाम्बीः जिले का कड़ा कस्बा एक ऐसा ऐतिहासिक स्थान, जिसकी पहचान सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि व्यापारिक समृद्धि से भी जुड़ी रही है. कहा जाता है कि दिल्ली सल्तनत के शासक अलाउद्दीन खिलजी के समय मे कड़ा में 52 मंडियां और 53 बाजार सजते थे. यह सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि व्यापार का एक बड़ा केंद्र हुआ करता था. प्रदेश के अलग-अलग जिलों से व्यापारी यहां आते थे. अपने सामान की खरीद-बिक्री करते थे, और कड़ा की धरती व्यापार की रौनक से जगमगाती थी. उस दौर में यहां अनाज, कपड़ा, मसाले और कई तरह के सामानों का बड़ा व्यापार होता था. जिससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलता था, लेकिन समय परिवर्तन के कारण अब कड़ा मे कोई व्यापार नहीं बचा अब सिर्फ नाम ही बचा है जिसे 52 मण्डी 53 बाजार के नाम से जाना जाता है.

अलाउद्दीन खिलजी का गवर्नर नियुक्त था

कड़ा निवासी मोहम्मद शमीम ने बताया की कड़ा एक ऐतिहासिक स्थल है. अलाउद्दीन के समय मे कड़ा एक सूबा था. पहले कड़ा का क्षेत्रफल अधिक था हथगांव से लेकर शाजादपुर तक कड़ा मे लगता था.  पहले कड़ा क़स्बा उत्तरप्रदेश की राजधानी हुआ करती थी, उस समय अलाउद्दीन खिलजी का गवर्नर नियुक्त था. अलाउद्दीन खिलजी के समय में कड़ा मे अधिक सड़के ना होने के कारण जो भी व्यापार होता था वह नाव के द्वारा होता था. उसे समय यहां पर 52 मंडी और 53 बाजार लगता था. इस मंडी पर प्रदेश के कोने-कोने से व्यापारी लोग खरीद और बिक्री के लिए आते थे क्योंकि यह मंडी देश और प्रदेश में काफी प्रसिद्ध थी, इसलिए लोग दूर-दूर से अपने व्यापार को करने के लिए आते थे.

कड़ा हुआ करती है राजधानी

युद्ध के दौरान मुगल शासक ने अलाउद्दीन खिलजी को हराने के बाद फिर कड़ा में मुगल सल्तनत लागू हो गई फिर बाबर ने फैसला लिया कि कड़ा से राजधानी को हटा करके इलाहाबाद के लिए ले जाया जाएगा. इलाहाबाद में संगम नदी के सामने बने किला में और उसके लिए को अकबर के द्वारा बनवाया गया था. लेकिन कड़ा का कस्बा अब पूरी तरह से उद्योग के लिए खत्म हो चुका है क्योंकि यहां पर कई उद्योग कार्य भी किए जाते थे जैसे सुई बनाना, कागज बनाना, बर्तन, ऐसे ही तमाम उद्योग कार्य किए जाते थे. जिससे लोगों के घर परिवार की परिवार की परवरिश करते थे. लेकिन समय बदलाव के कारण कड़ा के निवासी लोग अब प्रदेश एवं देश में अपने रोजगार के लिए रह रहे हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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