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  • निपुण विद्यालय आकलन से सुधरेगी शिक्षा गुणवत्ता, कमियों पर रहेगा फोकस
  • विद्यालय चलो अभियान में लक्ष्य अधूरा, नामांकन बढ़ाने के दिए सख्त निर्देश
  • डिजिटल शिक्षा और ऐप उपयोग को शत-प्रतिशत करने पर प्रशासन का जोर
  • सघर्षशील विद्यालयों की होगी विशेष निगरानी, बेहतर स्कूलों को मिलेगा सम्मान
  • शिक्षा व्यवस्था को परिणामोन्मुखी बनाने के लिए बनी ठोस रणनीति

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। दुर्गावती देवी सभागार, विकास भवन में गुरुवार को मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल की अध्यक्षता में बेसिक शिक्षा विभाग की अप्रैल माह की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद की शैक्षिक गुणवत्ता, नामांकन स्थिति, निपुण विद्यालय आकलन तथा विभिन्न शैक्षिक योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक की शुरुआत मार्च माह की समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ हुई। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि निपुण विद्यालय आकलन का उद्देश्य केवल रैंकिंग प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यालयों में मौजूद कमियों को चिन्हित कर शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना है। उन्होंने निर्देश दिए कि जनपद में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार के लिए निपुण प्रकोष्ठ का सक्रिय सहयोग लिया जाए तथा जिला प्रबंधन सूचना प्रणाली इकाई और निपुण टीम संयुक्त रूप से निगरानी पट तैयार करें। उन्होंने निर्देशित किया कि निपुण विद्यालय आकलन के परिणामों की पिछले तीन वर्षों से तुलना की जाए और निरंतर बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को सम्मानित किया जाए। साथ ही पूर्व ग्रीष्मकालीन अभिभावक-शिक्षक बैठक की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

आरटीई के अंतर्गत प्रवेश की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने दस-दस विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की विशेष बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि एक अप्रैल से विद्यालय चलो अभियान प्रारंभ हो चुका है, जिसमें अब तक नौ हजार बच्चों का नामांकन हुआ है, जबकि लगभग अठारह हजार बच्चों का लक्ष्य अभी शेष है। इस अंतर को खंडवार विभाजित कर शीघ्र पूरा करने के निर्देश बेसिक शिक्षा अधिकारी को दिए गए। उन्होंने कहा कि तीन से पांच वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का बाल वाटिका में शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित किया जाए तथा छह वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक बच्चे का विद्यालय में नामांकन कराया जाए। मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि जनपद के सभी विद्यालय अब संपर्क दूरदर्शन से आच्छादित हो चुके हैं, इसलिए शिक्षक नियमित रूप से डिजिटल माध्यम से शिक्षण कार्य संचालित करें और आंकड़ों का समय-समय पर समन्वयन सुनिश्चित करें।

चिंपल अनुप्रयोग के उपयोग की समीक्षा करते हुए उन्होंने बताया कि अभी तक 97 प्रतिशत डाउनलोड हुआ है, जिसे शत-प्रतिशत किया जाना आवश्यक है। शिक्षकों को निर्देश दिए गए कि वे विद्यार्थियों को नियमित शैक्षिक कार्य दें तथा कक्षा एक और दो के विद्यार्थियों के अभिभावकों को अधिक से अधिक इस मंच से जोड़ा जाए। सहायक संदर्भ व्यक्तियों को निर्देशित किया गया कि साप्ताहिक मूल्यांकन अनुश्रवण तथा निपुण प्लस अनुप्रयोग के माध्यम से मूल्यांकन में अंतर को दूर करें। मई माह में सभी बच्चों का शत-प्रतिशत निपुण आकलन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। अप्रैल माह में मेगा अभिभावक-शिक्षक बैठक को सफल बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

मुख्य विकास अधिकारी ने संघर्षशील विद्यालयों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि ऐसे विद्यालयों की सतत निगरानी कर शैक्षिक स्तर में सुधार लाया जाए। बैठक में डायट उपप्राचार्य ज्योति दीक्षित, बेसिक शिक्षा अधिकारी ओ.पी. यादव सहित विभिन्न विभागीय अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, शैक्षिक सहयोगी संस्थाओं एवं विभिन्न शैक्षिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, परिणामोन्मुखी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए ठोस रणनीति पर बल दिया गया, जिससे जनपद में बुनियादी शिक्षा का स्तर नई ऊंचाइयों तक पहुंच सके।

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