गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित गौर ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में लगी आग ने सिर्फ घरों की दीवारें और सामान ही नहीं जलाया, बल्कि कई परिवारों की भविष्य की योजनाओं और सपनों को भी राख में बदल दिया। आग की चपेट में आए सात फ्लैटों में से छह में परिवार रह रहे थे। अब ये परिवार रिश्तेदारों के यहां शरण लेने के लिए मजबूर हैं।
इन फ्लैटों में रहने वाले परिवारों ने अपनी जिंदगी की जमा पूंजी लगाकर घर बनाए थे। हर कमरे में जरूरत और पसंद का सामान धीरे-धीरे जोड़ा गया था। कुछ ही मिनटों में इन घरों का फर्नीचर, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, जरूरी दस्तावेज, बच्चों की किताबें सब कुछ जलकर खाक हो गया। कई परिवारों के आधार कार्ड, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और बैंक से जुड़े दस्तावेज भी आग में जल गए।
2 of 21
इंदिरापुरम की गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसायटी के फ्लैटों में लगीभीषण आग
– फोटो : अमर उजाला
आग बुझने के बाद जब लोग अपने फ्लैटों में लौटे तो सामने सिर्फ जली हुई दीवारें और राख का ढेर था। जिन घरों में सुबह तक सामान्य दिनचर्या चल रही थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ था। कई लोग अपने जले हुए घरों के बाहर खड़े होकर रोते नजर आए। कोई राख में अपना सामान ढूंढ रहा था तो कोई खामोशी से टूटे सपनों को देख रहा था।
3 of 21
इंदिरापुरम की गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में भीषण आग के बाद बाहर निकले लोग और दमकल की गाड़ियां
– फोटो : अमर उजाला
फ्लैट संख्या 1145 में रहने वाले डॉ. डार सिंह ने बताया कि घर बनाने में वर्षों लग जाते हैं लेकिन एक झटके में सब खत्म हो गया। अब फिर से शुरुआत कैसे होगी, समझ नहीं आ रहा। फ्लैट संख्या 942 भी आग की भेंट चढ़ गया। इसके मालिक अनूप शर्मा ने बताया कि लंबे समय से फ्लैट को सजाने-संवारने में लगे थे लेकिन अब सब राख हो चुका है।
4 of 21
इंदिरापुरम की गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसायटी के फ्लैटों में लगीभीषण आग
– फोटो : अमर उजाला
फ्लैट संख्या 1043 के मालिक अशोक कुमार वर्मा ने भी हादसे में सब खो दिया। कमल पालीवाल के सामने वाले फ्लैट संख्या 942 में रहने वाली रुचि शर्मा ने बताया कि उन्हें लगभग साढ़े आठ बजे सोसायटी में ही रहने वाली एक दोस्त ने फोन करके आग की सूचना दी।
5 of 21
इंदिरापुरम की गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में भीषण आग के बाद जलकर राख हुआ सामान
– फोटो : अमर उजाला
उस समय वह बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने दरवाजा खोला तो सामने वाले फ्लैट से आग की तेज लपटें उनकी ओर आईं। पिता ने उन्हें पकड़कर पीछे खींचा और दरवाजा बंद किया। उन्होंने बताया कि आग की लपटें इतनी तेज थी कि पिता उन्हें पीछे नहीं खींचते तो वह झुलस जातीं।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||