Pune Gas Leak: केमिकल कंपनियों और फैक्ट्रियों में तमाम तरह की सावधानियां बरती जाती हैं, इसके बावजूद किसी न किसी तरह की घटनाएं सामने आ ही जाती हैं. महाराष्ट्र के पुणे में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक केमिकल कंपनी से गैस रिसाव होने की वजह से अफरा-तफरी मच गई. कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई है.
पुणे में एक केमिकल फैक्ट्री से गैस लीक होने लगी. इस वजह से आसपास खलबली मच गई. (सांकेतिक तस्वीर)
गैस लीक की घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया. गैस के प्रभाव को कम करने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फायर ब्रिगेड के लगभग 30 जवानों ने बीए सेट (ब्रीदिंग अप्पारेटस) पहनकर ऑपरेशन चलाया. इस दौरान फायर ब्रिगेड के एक अधिकारी और एक जवान भी गैस के संपर्क में आने से प्रभावित हुए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. प्रशासन के अनुसार, फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है. एहतियात के तौर पर इलाके की निगरानी की जा रही है, ताकि दोबारा ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न न हो. स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें.
तीन सफाईकर्मियों की हो गई थी मौत
कुछ दिनों पहले भी पुणे में जहरीली गैस से बड़ा हादसा हुआ था. पुणे में एक नाले की सफाई करने उतरे उत्तर प्रदेश के 3 प्रवासी सफाई कर्मचारी जहरीली गैस की चपेट में आ गए थे. इस जहरीली गैस के कारण दम घुटने से तीनों की मौत हो गई थी. यह कोई अकेली घटना नहीं थी. साल 2017 से लेकर अब तक पूरे देश में 620 से भी ज्यादा सफाई कर्मचारियों की जान जा चुकी है. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि उनका काम कितना जोखिम भरा है और इस ओर कितनी अनदेखी की जा रही है.
पीड़ित परिवार को मुआवजे का इंतजार
जहरीली गैस की चपेट में आने से जान गंवाने वालों या गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को एक और तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इन त्रासदियों के बाद भी कई परिवारों को वो सहारा नहीं मिल पाता है जिसके वे हकदार हैं. अब तक 52 परिवारों को कोई मुआवजा नहीं मिला है. उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं. पुणे की ताजा घटना की पुलिस अब जांच कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि क्या सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई थी. इन जरूरी कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा उपकरण, सही ट्रेनिंग और उचित मुआवजा मिलना चाहिए, ताकि उन्हें ऐसे हालात में बेसहारा और असुरक्षित न छोड़ दिया जाए.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
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