West Bengal Chunav 2026 : पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में विपक्ष के लिए 100 सीटों का आंकड़ा पार करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है. 2021 में बीजेपी ने 77 सीटें जीतकर एक नया रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन पिछले चुनाव से पहले सिर्फ एक ही बार विपक्षी दल ने बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद 100 का आंकड़ा पर किया था. क्या 2026 में 92.7% की रिकॉर्ड वोटिंग इस मिथक को तोड़ेगी? जानिए आजादी के बाद से अब तक के प्रमुख चुनावी आंकड़े.
बंगाल चुनाव में 100 नंबर वाला अभिशाप. (फोटो PTI)
बंगाल के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें, तो विपक्ष के लिए 100 का आंकड़ा हमेशा से एक कांच की दीवार की तरह रहा है. साल 1952 से लेकर 2021 तक सिर्फ एक बार छोड़ दें तो विपक्ष ने कभी भी 100 का आंकड़ा पार नहीं किया है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में एक दिलचस्प पैटर्न रहा है. मुख्य विपक्षी दल ने ज्यादातर बार 100 सीटों का आंकड़ा पार नहीं किया. 2021 में भाजपा ने पहली बार मुख्य विपक्षी पार्टी बनते हुए 77 सीटें जीतीं. यह बंगाल के इतिहास में एक नया अध्याय था. लेकिन क्या यह रिकॉर्ड है? और 2026 के आगामी चुनाव में भाजपा-टीएमसी की जंग में क्या विपक्ष 100 पार करेगा या फिर नतीजा एकतरफा ही रहेगा? देखें 1952 से 2021 तक केचुनावों का पूरा आंकड़ा
बीजेपी और टीएमसी में इस बार कौन पार करेगा 100 का आंकड़ा?
1952: कांग्रेस 150 | मुख्य विपक्ष CPI-28
1957: कांग्रेस 152 | मुख्य विपक्ष- 46
1962: कांग्रेस 157 | CPI- 50
1967: यूनाइटेड फ्रंट (गठबंधन सरकार) | कांग्रेस- 127 (यह एकमात्र मौका जब मुख्य विपक्ष ने 100 पार किया, लेकिन गठबंधन की वजह से सरकार नहीं बनी)
1969: CPI(M) नेतृत्व गठबंधन | कांग्रेस -55
1971: हैंग असेंबली (CPI(M) 113, INC(R) 105) | INC(R)-105 (अस्थिर, बाद में 1972 में नया चुनाव)
1972: INC(R) 216 | CPI -35
1977: लेफ्ट फ्रंट (CPI(M) 178) | जनता पार्टी-29
1982: लेफ्ट फ्रंट (CPI(M) 174) | कांग्रेस-49
1987: लेफ्ट फ्रंट (CPI(M) 187) | कांग्रेस-40
1991: लेफ्ट फ्रंट (CPI(M) 182) | कांग्रेस-43
1996: लेफ्ट फ्रंट (CPI(M) 153) | कांग्रेस-82
2001: लेफ्ट फ्रंट (CPI(M) 143) | तृणमूल कांग्रेस-60
2006: लेफ्ट फ्रंट (CPI(M) 176) | तृणमूल-30
2011: तृणमूल 184 | कांग्रेस- 42 (CPI(M) 40 के करीब)
2016: तृणमूल 211 | कांग्रेस- 44
2021: तृणमूल 215 | भाजपा-77 (पहली बार भाजपा मुख्य विपक्ष, 2016 की 3 सीटों से 74 की छलांग!)
विपक्षी पार्टी ने सिर्फ एक बार 100 का आंकड़ा पार किया
बंगाल में 34 साल के लेफ्ट राज 1977-2011 में मुख्य विपक्ष कांग्रेस या तृणमूल कभी 82 से ज्यादा नहीं पहुंचा. तृणमूल के राज 2011 से अब तक विपक्ष की सबसे बड़ी सेंचुरी 77 भाजपा 2021 ही रही. शुरुआती कांग्रेस राज में भी CPI 50 से ऊपर नहीं गया. सिर्फ 1967 और 1971 जैसे हैंग असेंबली में विपक्षी पार्टी को 105 सीटें आईं थीं. लेकिन किसी की सरकार नहीं बनी. 2021 में भाजपा ने 38% वोट शेयर के साथ 77 सीटें जीतीं. यह बंगाल में ‘दो-ध्रुवीय’ लड़ाई की शुरुआत थी. अगर 2026 में भाजपा अपना वोट शेयर बढ़ाकर 42-45% तक ले जाती है और 50-60 सीटों पर कसी हुई हार को पलट देती है तो बीजेपी 100 का आंकड़ा पार कर सकती है और बंगाल में पहली बार सरकार भी बना सकती है.
इस बार के बंगाल चुनाव में ‘झालमुड़ी पॉलिटिक्स’, ‘सब्जी पॉलिटिक्स’ और ‘हिंदुत्व बनाम बंगाली अस्मिता’ की जंग छिड़ी है, उसने मुकाबले को बेहद करीबी बना दिया है. पहले चरण की 152 सीटों पर हुई बंपर वोटिंग को राजनीतिक विश्लेषक हैरान हैं. वहीं, टीएमसी का मानना है कि ममता बनर्जी की ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाएं और ‘बाहरी’ वाला नैरेटिव विपक्ष को 100 के नीचे ही समेट देगा. 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण की 142 सीटें यह तय करेंगी कि क्या बीजेपी 2021 के अपने 77 सीटों के रिकॉर्ड को तोड़कर 100 पार करेगी या ममता बनर्जी एक बार फिर एकतरफा मुकाबल बनाएगी. 4 मई के नतीजे बंगाल के इतिहास में विपक्ष की नई हैसियत तय करेंगे.
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I am an alumnus of Bharatiya Vidya Bhavan, Delhi with a career in journalism that spans across several prestigious newsrooms. Over the years, I have honed my craft at Sahara Samay, Tehelka, P7 and Live India, a…और पढ़ें
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