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Jaunpur News: जौनपुर का ऐतिहासिक शाहीपुल अपने आपमें खास है, लेकिन आज यही पुल बदहाली का शिकार है. स्थानीय लोग मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की अनदेखी जारी है. समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो 500 साल की यह ऐतिहासिक धरोहर खो सकती है.

पुल की हालत देखकर लगता है कि इतिहास की उस भावना को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।

जौनपुर का ऐतिहासिक शाहीपुल आज अपनी बदहाल स्थिति में खड़ा है. कभी यह पुल शहर की पहचान हुआ करता था, लेकिन अब इसकी हालत लगातार खराब होती जा रही है. जगह-जगह दरारें दिखाई दे रही हैं और पुल की सतह कमजोर पड़ती नजर आ रही है. हैरानी की बात यह है कि इतने महत्वपूर्ण धरोहर की देख-रेख के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है.

कई बार इस ओर ध्यान दिला चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक चुप्पी साधे हुए हैं।

मुगल बादशाह अकबर ने एक महिला के दर्द को समझते हुए इस शाहीपुल के निर्माण का आदेश दिया था. यह पुल न केवल यातायात का साधन था, बल्कि उस समय की संवेदनशीलता और वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण भी है. लेकिन आज उसी पुल की हालत देखकर लगता है कि इतिहास की उस भावना को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है.

प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई अभी तक देखने को नहीं मिली है।

पुल की दीवारों और किनारों पर अब छोटे-छोटे पेड़ उग आए हैं, जो धीरे-धीरे इसकी मजबूती को नुकसान पहुंचा रहे हैं. समय रहते इन पेड़ों को हटाने और मरम्मत का काम न किया गया, तो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है. स्थानीय लोग कई बार इस ओर ध्यान दिला चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक चुप्पी साधे हुए हैं.

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लापरवाही भविष्य में और बड़े नुकसान का कारण बन सकती है, जिसे समय रहते रोका जाना जरूरी है।

शाहीपुल पर बढ़ती दरारें एक बड़े खतरे का संकेत दे रही हैं. रोजाना हजारों लोग इस पुल से गुजरते हैं, ऐसे में किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. सुरक्षा के लिहाज से यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई अभी तक देखने को नहीं मिली है.

इसे बचाना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

पुल की हालत में कोई सुधार नहीं दिखा. जहां एक कारण संरचना और कमजोर हो सकती है, वहीं मरम्मत कार्य की गति पूरी तरह ठप है. यह लापरवाही भविष्य में और बड़े नुकसान का कारण बन सकती है, जिसे समय रहते रोका जाना जरूरी है.

यदि विकास के साथ-साथ विरासत को भी महत्व दिया जाए, तभी शहर का संतुलित विकास संभव हो पाएगा।

नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही इस ऐतिहासिक धरोहर की मरम्मत नहीं हुई तो जौनपुर अपनी एक अनमोल पहचान खो देगा. शाहीपुल सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि शहर के गौरव और इतिहास का प्रतीक है. इसे बचाना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है.

जौनपुर का यह 500 साल पुराना इतिहास बचाया जा सकता है, वरना आने वाली पीढ़ियां इसे सिर्फ किताबों में ही देख पाएंगी।

विकास के नाम पर शहर में कई नए प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहा है, लेकिन पुराने ऐतिहासिक स्थलों की अनदेखी हो रही है. शाहीपुल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. यदि विकास के साथ-साथ विरासत को भी महत्व दिया जाए, तभी शहर का संतुलित विकास संभव हो पाएगा.

इतने महत्वपूर्ण धरोहर की देखरेख के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है।

जरूरत है कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लें और तत्काल मरम्मत व संरक्षण का कार्य शुरू करें. विशेषज्ञों की मदद से शाहीपुल को सुरक्षित किया जा सकता है. अगर अभी कदम उठाए गए, तो जौनपुर का यह 500 साल पुराना इतिहास बचाया जा सकता है, वरना आने वाली पीढ़ियां इसे सिर्फ किताबों में ही देख पाएंगी.

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