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रामप्रसाद बताते हैं कि उन्होंने करीब 2 एकड़ खेत में इस खास किस्म की शिमला मिर्च की खेती की है शुरुआत में लागत थोड़ी ज्यादा जरूर लगी लेकिन अब वही खेती उन्हें लगातार कमाई दे रही है. किसान के मुताबिक इस फसल में पौधा लगाने के करीब 65 ही दिनों बाद मिर्च आनी शुरू हो जाती है धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ता है और फिर हर हफ्ते हार्वेस्टिंग होने लगती है.

रामपुर: रामपुर जिले के मिलकखानम इलाके के किसान रामप्रसाद इन दिनों अपनी शिमला मिर्च की खेती को लेकर चर्चा में हैं आमतौर पर किसान गेहूं-धान जैसी पारंपरिक खेती पर निर्भर रहते हैं लेकिन रामप्रसाद ने थोड़ा अलग सोचकर 1509 वेरायटी की शिमला मिर्च लगाई और आज उसी का फायदा उन्हें सीधा मुनाफे के रूप में मिल रहा है.

रामप्रसाद बताते हैं कि उन्होंने करीब 2 एकड़ खेत में इस खास किस्म की शिमला मिर्च की खेती की है शुरुआत में लागत थोड़ी ज्यादा जरूर लगी लेकिन अब वही खेती उन्हें लगातार कमाई दे रही है. किसान के मुताबिक इस फसल में पौधा लगाने के करीब 65 ही दिनों बाद मिर्च आनी शुरू हो जाती है धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ता है और फिर हर हफ्ते हार्वेस्टिंग होने लगती है.

एक बीघा में 20 कुंतल पैदावार

वे बताते हैं कि इस फसल को लगाए अब करीब 8 महीने हो चुके हैं और पिछले कई महीनों से लगातार तुड़ाई चल रही है. खास बात ये है कि हर हफ्ते खेत से मिर्च निकल रही है जिससे आमदनी भी लगातार बनी हुई है. किसान के मुताबिक यह वेरायटी प्रति बीघा करीब 20 क्विंटल तक उत्पादन दे रही है, जो कि सामान्य फसलों के मुकाबले काफी अच्छा माना जाता है. रामप्रसाद की उगाई हुई शिमला मिर्च आकार में बड़ी और गोल होती है. देखने में इसका रंग हल्का काला है. स्वाद की बात करें तो इसमें हल्की तीखापन भी होता है, जिससे इसकी डिमांड बढ़िया रहती है इसलिए उनकी फसल की मांग सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है. किसान बताते हैं कि उनके खेत से सीधे मिर्च बिहार के पटना, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और वाराणसी के साथ-साथ दिल्ली तक भेजी जा रही है. यानी एक तरह से उनकी खेती अब लोकल से निकलकर दूसरे राज्यों के बाजार तक पहुंच चुकी है जिससे उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं.

आठ महीने में कमाए चार लाख

लागत की बात करें तो रामप्रसाद बताते हैं कि इस वेरायटी का 10 ग्राम बीज करीब 1100 रुपये का आता है. पूरे 2 एकड़ खेत में खेती करने के लिए उन्हें कुल मिलाकर करीब 4 लाख रुपये की लागत आई इसमें बीज, खाद, दवाई, सिंचाई और मजदूरी सब शामिल है. लेकिन अच्छी बात ये रही कि 8 महीने के अंदर ही उन्होंने अपनी पूरी लागत निकाल ली यानी जितना पैसा लगाया था उतना वापस आ गया और उतना ही मुनाफा भी हो चुका है. किसान के मुताबिक अभी एक-दो बार और हार्वेस्टिंग बाकी है जिससे और कमाई होगी. अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ थोड़ी अलग फसलों पर ध्यान दें और बाजार की मांग को समझकर खेती करें तो कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. शिमला मिर्च जैसी सब्जियां ऐसी ही फसलें हैं जिनमें मेहनत तो लगती है लेकिन कमाई भी अच्छी होती है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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