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सहारनपुर: यह जिला दुनिया भर में अपने लकड़ी पर नक्काशी के लिए जाना जाता है. इन दिनों उस पर संकट के बादल नजर आ रहे हैं. यह सब हो रहा है मिड लिस्ट में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी के कारण. शिवालिक पर्वतमाला की गोद में बसे इस जिले के कारीगरों ने अपनी नक्काशी से न केवल लकड़ी को सुंदर रूप दिया, बल्कि भारत की पारंपरिक कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी दिलाई है.

ब्रिटिश काल से ही लकड़ी की कारीगरी में आगे

ब्रिटिश काल में सहारनपुर जिले में रुड़की, हरिद्वार और देहरादून का क्षेत्र भी शामिल था. उस समय जिले में वन क्षेत्र 1,88,433 एकड़ था. वर्ष 1878 में सहारनपुर वन क्षेत्र को चार भागों सहारनपुर रेंज, मोहंड, बड़कलां, होलखंड और रानीपुर में बांट दिया गया. अंग्रेजी शासन काल में भी यहां से लकड़ी यूरोपीय देशों में इमारत निर्माण के लिए भेजी जाती थी. आज भी सहारनपुर के वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, रूस और यूक्रेन जैसे देशों में किया जाता है. लेकिन इन दिनों मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव के बीच यहां का कारोबार लगभग 30% रह गया है जबकि नए ऑर्डर आने की लगभग बंद हो गए हैं, ऑर्डर करने वाले लोगों में डर का माहौल देखा जा रहा है US, गल्फ और यूरोप में कुछ माल होल्ड पर हो चुका है तो वहां से आने वाले ऑर्डर भी बेहद कम हो चुके हैं. और वुड कार्विंग के इस व्यापार पर संकट के बदले गहरे होते जा रहे हैं.

80 फीसदी घट गए ऑर्डर

एक्सपोर्टर अनस इमाम ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि मिडिल ईस्ट में युद्ध और अब तनाव के बीच हमारा व्यापार ही नहीं बल्कि जो भी बिजनेस वहां से संबंधित है वह सभी प्रभावित है. और अगर खास तौर से हम अपनी बात करते हैं तो बिल्कुल अगर हमारे पास तकरीबन 100 ऑर्डर थे जो कि अब घटकर 15 से 20 रह गए हैं. क्योंकि एक डर बना हुआ है यहां से सामान भेजते हुए भी और वहां के लोगों को सामान मंगवाते हुए भी. इसके बाद वहां से पेमेंट आने का मसला भी है. क्योंकि जहां पर युद्ध जैसी स्थिति होती है. वहां पर सामान का बेचना और खरीदना बेहद मुश्किल हो जाता है क्योंकि हमारा जो बिजनेस है वह लकड़ी के फर्नीचर, गिफ्ट आइटम तो निश्चित तौर पर ऐसे माहौल में इस तरीके की चीजे कोई नहीं खरीदेगा और उससे हमारा बिज़नेस बहुत ज्यादा प्रभावित होगा.

हम लोग फर्नीचर में होम डेकोरेशन, डाइनिंग टेबल, बेड, सोफे, गिफ्ट आइटम इन सब चीजों को बनाते हैं. हमारा ज्यादा बिजनेस US, गल्फ और यूरोप में है. प्रत्येक वर्ष के मुकाबले जितना साल का सहारनपुर का लकड़ी में टर्नओवर है पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष 20 से 30% ही हो पाएगा. इन देशों में तनाव के कारण बहुत ज्यादा नुकसान सहारनपुर के वुड कार्विंग को हो रहा है क्योंकि लोग आर्डर करते हुए भी डर रहे हैं और यहां के लोग उस ऑर्डर को बनाते हुए भी डर रहे हैं.

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