महानगरों की सुविधाओं और चमक-दमक से दूर, देश की कई युवा महिलाएं आज गांवों में बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। ये बेटियां न केवल अपने सपनों को नई दिशा दे रही हैं, बल्कि हजारों ग्रामीण महिलाओं के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। पिछले एक साल से अधिक समय से ये युवतियां अलग-अलग राज्यों के दूरदराज क्षेत्रों में रहकर शिक्षा, आजीविका और सामाजिक जागरूकता के जरिए विकास की मजबूत नींव तैयार कर रही हैं। इनका मानना है कि असली विकास तभी संभव है, जब गांव सशक्त होंगे। यही सोच इन्हें शहर छोड़कर ग्रामीण भारत की चुनौतियों के बीच काम करने के लिए प्रेरित कर रही है।
2 of 6
पिंकी वर्मा
– फोटो : अमर उजाला
हुनर को नया जीवन दे रहीं पिंकी वर्मा
तमिलनाडु के रामनाथपुरम में पिंकी वर्मा ने पारंपरिक पाम फ्रॉन्ड कला को पुनर्जीवित कर महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। उनके प्रयासों से कई महिलाओं को स्थायी आय का साधन मिला और खोती हुई कला को नई पहचान मिली। उनका कहना है कि गांव की मेहनत को सही दिशा मिल जाए, तो चमत्कार संभव है।
3 of 6
संजना यादव
– फोटो : अमर उजाला
जेंडर समानता की अलख जगा रहीं संजना यादव
राजस्थान के तिलोनिया में संजना यादव बच्चों के बीच लैंगिक समानता पर काम कर रही हैं। उन्होंने शिक्षा और गतिविधियों के माध्यम से सोच बदलने की पहल की, जिसका असर कई संस्थानों तक पहुंचा। उन्होंने ने कहा गांव में काम करते हुए असल चुनौतियों का सामना करना सीखने को मिला।
4 of 6
परार्धा गोयल
– फोटो : अमर उजाला
बुनकरों की जिंदगी बदल रहीं परार्धा गोयल
पश्चिम बंगाल के फुलिया में परार्धा गोयल ने महिला बुनकरों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने का काम किया। उन्होंने कार्यस्थल सुधार और आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया। अनका मानना है कि सशक्तिकरण केवल कमाई नहीं, सम्मान भी है।
5 of 6
साक्षी जैमिनी
– फोटो : अमर उजाला
खेतों से आत्मनिर्भरता की राह बना रहीं साक्षी जैमिनी
ओडिशा के संबलपुर में साक्षी जैमिनी ने मशरूम उत्पादन के जरिए महिलाओं को कम लागत में अधिक आय का रास्ता दिखाया। उनका कहना है कि सही मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाएं भी आगे बढ़ सकती हैं।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||