राजधानी में सरकारी वाहनों की लापरवाही से प्रदूषण बढ़ने का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार की कई गाड़ियां बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के सड़कों पर दौड़ रही हैं। इस नियम उल्लंघन पर 60 वाहनों के चालान भी किए जा चुके हैं।
दिल्ली परिवहन विभाग के संयुक्त आयुक्त मुकेश की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि नवंबर 2024 में जब याचिका दायर हुई थी, तब अधिकांश सरकारी वाहनों के पास पीयूसी नहीं था। हालांकि बाद में कुछ वाहनों ने प्रमाणपत्र बनवा लिया, लेकिन अब भी कई गाड़ियां बिना पीयूसी के संचालन में हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ पुराने वाहनों को कंडेम्न कर उनका पंजीकरण रद्द किया जा चुका है या उन्हें स्क्रैप किया गया है। इसके बावजूद कई बीएस-3 और बीएस-4 श्रेणी के वाहन अब भी उपयोग में हैं, जो अधिक प्रदूषण फैलाते हैं और वायु गुणवत्ता पर नकारात्मक असर डालते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 7 अप्रैल 2026 को सख्त आदेश जारी किए हैं। सभी विभागों, बोर्ड, निगम और सरकारी संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि बिना वैध पीयूसी वाली गाड़ियों का किसी भी सरकारी कार्य में उपयोग न किया जाए। यह निर्देश किराए और आउटसोर्स वाहनों पर भी समान रूप से लागू होंगे।
वाहनों का पीयूसी रिन्यू कराने के निर्देश-
सभी विभागों को 10 अप्रैल 2026 तक अपने वाहनों का पीयूसी रिन्यू कराने के निर्देश दिए गए हैं और इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागाध्यक्षों को सौंपी गई है। यह पूरा मामला केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 115 से जुड़ा है, जिसमें हर वाहन के लिए वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र अनिवार्य है।
याचिकाकर्ता जितेंद्र महाजन ने उठाए गए इस मुद्दे में 106 सरकारी वाहनों की सूची भी रिपोर्ट में शामिल है। इनमें कई वाहन 10 से 15 साल पुराने हैं, जो अब भी सड़कों पर चल रहे हैं। ऐसे में राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के बीच यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और सख्त निगरानी की जरूरत को उजागर करता है।
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