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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 21 से 23 अप्रैल जर्मनी दौरे पर जाएंगे. वहां वह जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ रक्षा सहयोग, डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप और प्रोजेक्ट 75I पनडुब्बी सौदे पर चर्चा करेंगे.
राजनाथ सिंह मंगलवार को जर्मनी के दौरे पर जा रहे हैं.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 21 से 23 अप्रैल तक जर्मनी के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर जाएंगे. इस दौरे के दौरान भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग को नया आयाम मिलने की उम्मीद है. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सिंह अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने, सैन्य-से-सैन्य संबंधों को मजबूत करने और साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में साझेदारी के अवसरों पर विस्तृत चर्चा होगी.
दौरे के दौरान डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में प्रशिक्षण सहयोग से जुड़े समझौतों पर भी सहमति बनने की उम्मीद है. रक्षा मंत्री जर्मन रक्षा उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे, ताकि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत संयुक्त विकास और उत्पादन को बढ़ावा मिल सके. इस दौरे में म्यूनिख में एक विशेष डिफेंस इन्वेस्टर समिट का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें भारत और जर्मनी की शीर्ष हथियार निर्माता कंपनियां भाग लेंगी.
चर्चा का प्रमुख मुद्दा प्रोजेक्ट 75I के तहत जर्मनी की कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ छह एडवांस्ड डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का सौदा भी हो सकता है, जिसकी अनुमानित लागत आठ अरब डॉलर (लगभग 43,000 करोड़ रुपये) बताई जा रही है. यह दौरा भारत-जर्मनी रक्षा संबंधों में सात वर्षों बाद हो रहा है. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है. जर्मनी अब भारत को आधुनिक सैन्य तकनीक, खासकर पनडुब्बी निर्माण, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन प्रौद्योगिकी में साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण भागीदार मान रहा है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बर्लिन में जर्मन सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, सैन्य नेताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी चर्चा करेंगे. उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में गहरे सहयोग, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना है. भारत जर्मनी को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भागीदार मानता है. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग न केवल द्विपक्षीय है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों जैसे आतंकवाद, साइबर हमले और समुद्री सुरक्षा के संदर्भ में भी प्रासंगिक है.
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