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होमताजा खबरदेशपहलगाम: साल भर पहले जहां बिछी थीं लाशें, आज उसी सेल्फी पॉइंट पर लौटी मुस्कान

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Pahalgam Attack Anniversary: एक साल पहले पहलगाम की बैसरन घाटी में गोलियों की गूंज थी, आज वहीं हंसी और उसी सेल्फी प्वाइंट पर सेल्फी की आवाज है. यह बदलाव सिर्फ हालात का नहीं, बल्कि हौसले का है. आतंक ने यहां डर जरूर फैलाया था, लेकिन उसे स्थायी नहीं बना सका. आज पर्यटकों की वापसी यह साबित कर रही है कि कश्मीर की खूबसूरती और लोगों का साहस हर मुश्किल पर भारी है.

पहलगाम: साल भर पहले जहां बिछी थीं लाशें, आज उसी सेल्फी पॉइंट पर लौटी मुस्कानZoom

पहलगाम का मशहूर सेल्फी पॉइंट आज फिर से पर्यटकों से गुलजार है. (फाइल फोटो)

Pahalgam Attack Anniversary: एक साल पहले पहलगाम की बैसरन घाटी में जो मंजर था, उसे याद करना आज भी रोंगटे खड़े कर देता है. देवदार के पेड़ों के बीच पसरी खामोशी, खून से सनी जमीन और बिछी हुई लाशें… यह सब उस दिन की भयावहता की गवाही दे रहे थे. 22 अप्रैल 2025 का वो दिन सिर्फ एक आतंकी हमला नहीं था, बल्कि कश्मीर के पर्यटन और लोगों के भरोसे पर गहरा वार था. लेकिन आज, ठीक एक साल बाद जब उसी जगह खड़े होते हैं तो तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. वही घाटी अब मुस्कानों से भरी है, वही सेल्फी पॉइंट अब उम्मीद की तस्वीर बन चुका है. यह बदलाव सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि इंसानियत की जिद का है. यह जिद कहती है कि डर के आगे झुकना नहीं बल्कि उससे लड़कर आगे बढ़ना है.

आज का पहलगाम हमें यह सिखाता है कि आतंक का असर चाहे जितना गहरा हो जिंदगी उससे बड़ी होती है. यहां लौटती भीड़ सिर्फ पर्यटकों की नहीं है, यह विश्वास की वापसी है. लोग अब भी उस घटना को याद करते हैं लेकिन उससे डरते नहीं हैं. बल्कि वे उसी जगह जाकर तस्वीरें खींच रहे हैं, जहां कभी मौत का सन्नाटा था. यह बदलाव अचानक नहीं आया, इसके पीछे सुरक्षा बलों की कड़ी मेहनत और प्रशासन की सतत कोशिशें हैं. अब यह घाटी फिर से जिंदा है, और यह कहानी सिर्फ एक जगह की नहीं, बल्कि पूरे देश के हौसले की है.

हमले के बाद प्रशासन और सुरक्षा बलों ने यहां सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से मजबूत किया है.

एक साल बाद पहलगाम: डर से भरोसे तक का सफर

  • हमले के बाद पहलगाम पूरी तरह सन्नाटे में डूब गया था. होटल खाली पड़े थे, बाजारों में ताले लटक रहे थे और घोड़ा चालकों के पास काम नहीं था. पर्यटक अचानक गायब हो गए थे और पूरी घाटी जैसे थम गई थी. बैसरन की हरियाली भी उस समय सूनी लगती थी क्योंकि वहां लोगों की आवाजें नहीं, बल्कि डर की खामोशी गूंजती थी. लेकिन आज हालात बदल चुके हैं. सड़कों पर फिर से रौनक है, दुकानों पर भीड़ है और घाटी में पर्यटकों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है. यह बदलाव एक दिन में नहीं आया, बल्कि धीरे-धीरे विश्वास की वापसी के साथ हुआ है, जो अब साफ तौर पर नजर आता है.
  • पहलगाम में आज सबसे ज्यादा जो चीज दिखती है, वह है लोगों के चेहरों पर लौटी हुई मुस्कान. स्थानीय दुकानदार, होटल मालिक और घोड़ा चालक अब फिर से अपने काम में जुट गए हैं. पहले जहां हर कोई अनिश्चितता और डर में जी रहा था, वहीं अब उम्मीद और आत्मविश्वास की झलक दिखती है. पर्यटकों की वापसी ने उनकी आजीविका को फिर से पटरी पर ला दिया है. लोग मानते हैं कि उस घटना का दर्द अभी भी कहीं न कहीं मौजूद है, लेकिन अब उस पर काबू पा लिया गया है और जिंदगी ने फिर से अपनी रफ्तार पकड़ ली है.
  • पर्यटक भी अब पहले से ज्यादा भरोसे के साथ यहां पहुंच रहे हैं. दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और कोलकाता से आए लोग बताते हैं कि उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की खबरें सुनने के बाद यहां आने का फैसला किया. उनका कहना है कि यहां की प्राकृतिक सुंदरता पहले जैसी ही मनमोहक है, लेकिन अब माहौल ज्यादा सुरक्षित और सहज महसूस होता है. कई पर्यटक ऐसे भी हैं जो पहले यहां आ चुके हैं और अब दोबारा लौटे हैं, ताकि वे अपनी पुरानी यादों को फिर से जी सकें और इस बदलाव को खुद महसूस कर सकें.

सेल्फी पॉइंट: जहां मौत थी, अब यादें बन रही हैं

  • पहलगाम का मशहूर सेल्फी पॉइंट आज फिर से पर्यटकों से गुलजार है. एक साल पहले जहां खौफ और सन्नाटा था, आज वहीं कैमरों की क्लिक और हंसी की आवाजें गूंज रही हैं. देशभर से लोग यहां पहुंच रहे हैं और घाटी की खूबसूरती को अपने साथ ले जा रहे हैं. महाराष्ट्र और गुजरात से आए कई पर्यटकों ने अपनी खुशी जाहिर की. दिल्ली से पहली बार आई एक पर्यटक ने कहा, ‘हम यहां बेहतर सुरक्षा की खबर सुनकर आए हैं. नजारे बेहद खूबसूरत हैं और माहौल काफी शांत है.’
  • कई पर्यटक ऐसे भी हैं जो पहले यहां आ चुके हैं और अब दोबारा लौटे हैं. कोलकाता से आई जोया ने बताया, ‘मैं कुछ साल पहले परिवार के साथ यहां आई थी और अब फिर आई हूं. जगह में थोड़ा बदलाव जरूर आया है, लेकिन इसकी खूबसूरती बिल्कुल वैसी ही है.’ यह बयान इस बात का संकेत है कि पहलगाम ने न सिर्फ खुद को संभाला है, बल्कि लोगों के दिलों में अपनी जगह भी फिर से बना ली है.
  • जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा बल लगातार हालात सामान्य करने में जुटे हैं. प्रमुख स्थानों पर त्वरित प्रतिक्रिया दल तैनात किए गए हैं, जिससे पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है. गुजरात से आए एक पर्यटक ने कहा, ‘अब यह जगह पहले से ज्यादा सुरक्षित लगती है और यहां के लोग भी काफी मिलनसार हैं.’ इन अनुभवों से साफ है कि पहलगाम में भरोसा धीरे-धीरे लौट रहा है और लोग बिना डर के यहां आ रहे हैं.

सुरक्षा व्यवस्था: भरोसे की सबसे बड़ी वजह

हमले के बाद प्रशासन और सुरक्षा बलों ने यहां सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से मजबूत किया है. हर महत्वपूर्ण स्थान पर त्वरित प्रतिक्रिया दल तैनात किए गए हैं. निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया गया है और चेकिंग को सख्त किया गया है. इन सभी उपायों का सीधा असर पर्यटकों के भरोसे पर पड़ा है. अब लोग यहां आते समय खुद को पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं. यही वजह है कि पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और घाटी में फिर से जीवन लौट आया है.

क्या फिर चमकेगा पहलगाम?

अगर वर्तमान स्थिति इसी तरह बनी रहती है, तो आने वाले समय में पहलगाम एक बार फिर कश्मीर का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन सकता है. बैसरन घाटी के विकास पर काम जारी है और नई सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं. सबसे अहम बात यह है कि लोगों का भरोसा वापस लौट रहा है, जो किसी भी पर्यटन स्थल के लिए सबसे बड़ी ताकत होता है. यह संकेत साफ है कि एक घटना इस जगह की पहचान को खत्म नहीं कर सकती, बल्कि हर बार पहलगाम और मजबूती के साथ उभरेगा.

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Sumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें

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