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साइबर जालसाजों ने सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर को डिजिटल अरेस्ट कर 1.29 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।  ग्रेटर नोएडा निवासी 72 वर्षीय बुजुर्ग बैंक ऑफ महाराष्ट्र में मैनेजर थे।

छह फरवरी को ट्राइ का अधिकारी बनकर एक जालसाज ने उन्हें कॉल कर कहा कि आपके नाम पर एक सिम कार्ड जारी हुआ है, जिसका इस्तेमाल गैरकानूनी कामों में हो रहा है। कुछ ही देर बाद जालसाजों ने वीडियो कॉल कर कहा कि आपको डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया है।

वीडियो कॉल पर उन्होंने कोर्ट जैसी सेटिंग दिखाई गई और कहा गया कि सहयोग नहीं करेंगे तो गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ठगों ने पीड़ित पर ्दबाव बनाया और कहा कि उसके बैंक खातों की जांच होगी। जांच पूरी होने तक घर से बाहर नहीं जाना है और फोन कॉल चालू रखना है। 

करीब दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर खाते का सत्यापन के नाम पर पीड़ित से रकम ट्रांसफर कराई गई। 13 फरवरी 2026 को करीब 51.95 लाख रुपये, 19 फरवरी को 48.95 लाख रुपये, 21 फरवरी को 10.95 लाख रुपये, 25 फरवरी को 17.20 लाख रुपये और 26 फरवरी को 56 हजार 962 रुपये ट्रांसफर किए गए।

इस तरह कुल 1 करोड़ 29 लाख 61 हजार 962 रुपये ठगों के खातों में चले गए। कुछ दिन बाद ठगों ने पीड़ित को सुप्रीम कोर्ट और मुंबई पुलिस के नाम से फर्जी लेटर भी भेजे और कहा कि उसे नो ड्यूज सर्टिफिकेट मिल गया है और पैसा जल्द वापस कर दिया जाएगा।

काफी समय बीतने के बाद भी पैसा वापस नहीं आया, तब ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद पीड़ित ने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत की। डीसीपी साइबर शैव्या गोयल का कहना है कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है और जांच की जा रही है। 

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