काबुल के नशा मुक्ति केंद्र पर पाकिस्तान के बम गिराए तो भारत ने इस बार निंदा के नाम पर कोई रस्म-अदायगी नहीं की, बल्कि एक ऐसा कड़ा प्रहार किया है, जिसकी गूंज रावलपिंडी के आर्मी हेडक्वार्टर से लेकर इस्लामाबाद के सत्ता के गलियारों तक साफ सुनी जा रही है. भारत ने स्पष्ट रूप से दुनिया को बताया है कि जिस जगह को निशाना बनाया गया, वह कोई सैन्य ठिकाना नहीं था, बल्कि एक अस्पताल था. एक ऐसा अस्पताल जहां नशे के शिकार लोग अपनी जिंदगी वापस पटरी पर लाने की जद्दोजहद कर रहे थे. ऐसे निहत्थे, बीमार और लाचार लोगों पर आसमान से बम बरसाना किसी भी संप्रभु राष्ट्र की सेना का काम नहीं हो सकता, यह सिर्फ एक आतंकवादी गिरोह की मानसिकता हो सकती है.
भारत ने पाकिस्तान के इस झूठ की भी धज्जियां उड़ा दीं कि वह किसी ‘आर्मी टारगेट’ को निशाना बना रहा था. नई दिल्ली ने साफ शब्दों में इसे नरसंहार कहा. कूटनीति में नरसंहार शब्द का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर और बड़े गंभीर मामलों में किया जाता है. भारत ने यह शब्द इस्तेमाल करके पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक वॉर क्रिमिनल के रूप में खड़ा कर दिया है.
रमजान का पाखंड और पाकिस्तान का घिनौना चेहरा
भारत के बयान का सबसे आक्रामक और सटीक वार वह था, जहां उसने पाकिस्तान के धार्मिक पाखंड को बेनकाब किया. पाकिस्तान खुद को ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ कहता है और इस्लाम के नाम पर ही दुनिया भर में अपना प्रोपेगेंडा चलाता है. लेकिन भारत ने दुनिया को याद दिलाया कि रमजान का वह पवित्र महीना, जो दुनिया भर के मुस्लिमों के लिए शांति, इबादत, आत्मचिंतन और दया का प्रतीक है, उस महीने में पाकिस्तान मुसलमानों का ही खून बहा रहा है.
भारत का यह बयान सीधे तौर पर इस्लामिक दुनिया यानी ओआईसी को भी एक आईना दिखाने की कोशिश है. कोई भी धर्म, कोई भी कानून और इंसानियत की कोई भी किताब किसी अस्पताल पर बम गिराने को जायज नहीं ठहरा सकती. अपनी अंदरूनी राजनीति, भुखमरी, महंगाई और चरमराती अर्थव्यवस्था से जनता का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान ने सीमा पार खून-खराबे का जो शॉर्टकट लिया है, भारत ने उस ‘पुरानी प्रवृत्ति’ की दुनिया के सामने बखिया उधेड़ दी है.
अफगानिस्तान अनाथ नहीं
भारत ने इस हमले को अफगानिस्तान की संप्रभुता पर खुला हमला बताया है. दशकों से पाकिस्तान अफगानिस्तान को अपना स्ट्रैटेजिक डेप्थ यानी अपनी जागीर मानता आया है. उसे लगता है कि वह जब चाहे डूरंड लाइन के पार जाकर बमबारी कर सकता है और कोई कुछ नहीं बोलेगा. लेकिन भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का अटूट समर्थन करके पाकिस्तान को सीधा संदेश दे दिया है कि अफगानिस्तान अनाथ नहीं है. भारत ने यह जता दिया है कि वह अफगानिस्तान के लोगों के साथ चट्टान की तरह खड़ा है. भारत और अफगानिस्तान की यह गहरी होती दोस्ती पाकिस्तान की सबसे बड़ी दुखती रग है. नई दिल्ली का यह स्टैंड यह स्पष्ट करता है कि भारत अब अपने पड़ोस में पाकिस्तान की इस बदमाशी को बर्दाश्त नहीं करेगा. भारत ने वह लक्ष्मण रेखा खींच दी है.
इंटरनेशनल कम्युनिटी को कड़ा संदेश- अब बहुत हुआ
भारत सिर्फ पाकिस्तान को सुनाकर चुप नहीं बैठा, बल्कि उसने इंटरनेशनल कम्युनिटी को भी कटघरे में खड़ा किया है. भारत ने साफ कहा है कि इस आपराधिक कृत्य के दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. यह अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों के लिए एक खुली चुनौती है, जो मानवाधिकारों की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन पाकिस्तान की इस खुली गुंडागर्दी पर अक्सर आंखें मूंद लेते हैं. भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि पाकिस्तान की इस करतूत की फाइल यूं ही बंद न हो जाए.
ब्रह्मा चेलानी बोले- शानदार फैसला
भारत का रुख देखकर सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी गदगद नजर आए. उन्होंने एक्स पर लिखा, भारत ने काबुल के ओमिद नशा मुक्ति अस्पताल पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमले में मरीजों और नागरिकों के ‘नरसंहार’ की निंदा कर बहुत अच्छा किया है. इसे कायरतापूर्ण और अमानवीय हमला कहना बिल्कुल सटीक है. यह हाल के दिनों में अफगान नशा मुक्ति केंद्र पर दूसरा पाकिस्तानी हमला था, इससे पहले कंधार में भी ऐसा ही किया गया था. जब से पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ अपना हवाई युद्ध शुरू किया है, भारत लगातार उन हमलों की मुखर आलोचना कर रहा है जिनमें बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए हैं. लेकिन, असल सवाल यह है कि क्या नई दिल्ली के पास सिर्फ निंदा करने के अलावा कोई और रणनीति है?
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