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हिमाचल प्रदेश सरकार ने कैबिनेट रैंक वापस ले लिया है। अब बोर्ड, निगम और आयोगों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, डिप्टी चेयरमैन, प्रधान सलाहकार और अन्य अधिकारियों के पास कैबिनेट रैंक नहीं रहेगा। इसे लेकर आज (मंगलवार को) आदेश जारी कर दिए है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के आदेशों के मुताबिक- इनके मासिक वेतन का 20 फीसदी हिस्सा भी 30 सितंबर 2026 तक कट जाएगा। यानी कैबिनेट रैंक की वापसी के बाद सरकार ने 20 फीसदी सैलरी रोकने का फैसला लिया है। सरल भाषा में समझे तो जिन्हें 2 लाख मासिक सैलरी मिल रही थी, उन्हें अब 1.60 लाख रुपए सैलरी मिलेगी। इस बाबत सभी प्रशासनिक सचिवों से कहा गया कि वे इन निर्देश को अपने-अपने विभागों व संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं और आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाए। सरकार द्वारा तर्क दिया गया प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सरल बनाने के लिए कैबिनेट रैंक की समीक्षा की गई है। आदेश में अधिकारियों को सभी संबंधित निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया है। कैबिनेट रैंक के कारण सरकार पर उठते रहे सवाल बता दें कि थोक में कैबिनेट रैंक के कारण हिमाचल सरकार पर समय समय पर सवाल उठते रहे है। विपक्ष इसे बार बार मुद्दा बनाता रहा है, क्योंकि कैबिनेट रैंक के साथ नियुक्तियां सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रही थी और जिलों में इनके दौरों के दौरान पुलिस और प्रशासन को भी प्रोटोकॉल की अनुपालना करनी पड़ती है। इनके गाड़ी, बंगले के साथ साथ वेतन भत्ते भी कैबिनेट रैंक के हिसाब से दिए जा रहे है। ये फायदा होगा लिहाजा सरकार द्वारा कैबिनेट रैंक वापस लेने के बाद सरकारी खर्च पर नियंत्रण होगा। इनके वेतन, भत्ते, गाड़ी इत्यादि सुविधाएं कैबिनेट रैंक के हिसाब से नहीं रहेंगे, बल्कि जिस बोर्ड निगम में तैनात है, उस हिसाब से मिलेंगे। इससे सरकार पर वित्तीय दबाव भी कुछ कम, VIP कल्चर में कमी, प्रोटोकॉल साफ और व्यवस्थित होगा। सीएम ने इन्हें दे रखा कैबिनेट रैंक हिमाचल सीएम ने राज्य वन निगम में केहर सिंह खाची, प्रधान मीडिया सलाहाकार नरेश चौहान, पॉलिटिकल एडवाइजर सुनील कुमार बिट्टू, योजना बोर्ड में भवानी सिंह पठानिया, राज्य पर्यटन निगम में आरएस बाली और सीएम के आईटी सलाहाकार गोकुल बुटेल को कैबनेट रैंक दे रखा है। राज्य पर 1.10 लाख करोड़ का कर्ज बता दें कि हिमाचल सरकार पर पहले से ही एक लाख 10 हजार करोड़ रुपए का कर्ज चढ़ चुका है। राज्य के अपने आय के साधन सिमित है। इस बीच केंद्र ने लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट भी बंद कर दी है। जून 2022 में राज्य का 3500 करोड़ का जीएसटी कंपनसेशन बंद हो चुका है। साल 2023 के शुरू में ही राज्य की लोन लेने की सीमा भी GDP के मुकाबले 5 फीसदी से घटाकर केंद्र ने 3 फीसदी कर दी है। ऐसे में राज्य सरकार के सामने गंभीर आर्थिक संकट वाली स्थिति पैदा हो गई है। तीन दिन बाद सीएम सुक्खू को आगामी वित्त वर्ष का बजट पेश करना है। ऐसे में सरकार ने पहले ही खर्चों में कटौती शुरू कर दी है।

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