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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के साथ चुनाव आयोग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है. आयोग ने राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कुल 19 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है. जानकारी के मुताबिक, इस फेरबदल में 13 जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और 4 पुलिस कमिश्नरों को बदला गया है.

उधर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने बड़ा सियासी दांव खेलते हुए एक साथ चार नए चेहरों को पार्टी में शामिल किया है. उम्मीदवारों की सूची जारी होने से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है.

दरअसल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजते ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. चुनाव आयोग की घोषणा के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं, वहीं राजनीतिक दल भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं. इस बार का विधानसभा चुनाव कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि एक ओर सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस लगातार एक और कार्यकाल के लिए मैदान में है, वहीं विपक्षी बीजेपी बंगाल में सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही है. दूसरी ओर वाम मोर्चा भी अपने संगठन को फिर से सक्रिय करते हुए चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में है.

बंगाल में चुनाव आयोग का ताबड़तोड़ एक्शन

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है. आयोग ने राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले और नई तैनाती के निर्देश जारी किए हैं. आयोग की ओर से 17 मार्च 2026 को जारी आदेश में राज्य सरकार को इन बदलावों को तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है.

6 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला

डॉ. राजेश कुमार सिंह (IPS-1997) — एडीजी एवं आईजीपी, साउथ बंगाल

के. जयरामन (IPS-1997) — एडीजी एवं आईजीपी, नॉर्थ बंगाल

डॉ. प्रणव कुमार (IPS-2003) — कमिश्नर ऑफ पुलिस, आसनसोल-दुर्गापुर

अखिलेश कुमार चतुर्वेदी (IPS-2005) — कमिश्नर ऑफ पुलिस, हावड़ा

अमित कुमार सिंह (IPS-2009) — कमिश्नर ऑफ पुलिस, बैरकपुर

सुनील कुमार यादव (IPS-2009) — कमिश्नर ऑफ पुलिस, चंदननगर

चार नए चेहरों की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पार्टी में शामिल होने वाले नए चेहरों में तनुश्री हांसदा, अब्दुल मतीन और शिवशंकर पाल शामिल हैं. इसके अलावा झाड़ग्राम से आदिवासी समाज के बीच प्रभाव रखने वाले मंगल सोरेन ने भी टीएमसी का दामन थामा है. सूत्रों के अनुसार, ये सिर्फ औपचारिक शामिली नहीं है, बल्कि पार्टी इन नए चेहरों को आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतार सकती है. ऐसे में टीएमसी का यह कदम चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है.

उनमें अंहकार पनप चुका- बीजेपी का ममता पर निशाना

भाजपा सांसद खगेन मुर्मू ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर कहा, ‘ममता बनर्जी ने इतने दिनों तक सभी अधिकारियों के साथ बंगाल को लूटने का काम किया. तृणमूल कांग्रेस चोरी कर रही है, लूट कर रही है, पश्चिम बंगाल की जनता का सम्मान भी लूटा जा रहा है. वहां हमारी राष्ट्रपति का भी अपमान किया गया. उनमें (ममता बनर्जी) अहंकार पनप चुका है. आज वे(ममता बनर्जी) जो आरोप लगा रही हैं, असल में ऐसा कुछ नहीं है…’

बीजेपी ने जारी की 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट

बीजेपी ने सोमवार को विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की, जिसमें 144 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए. भाजपा ने इस सूची में कई प्रमुख चेहरों को मैदान में उतारा है. पार्टी ने ममता बनर्जी को घेरने के लिए सुवेंदु अधिकारी को दो जगह भवानीपुर और नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया है. पिछले चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में सीएम ममता बनर्जी को करीब 2000 वोटों के अंतर से हराया था.

इसके अलावा सुवेंदु अग्निमित्र पॉल को आसनसोल दक्षिण सीट से टिकट दिया गया है, जबकि कूचबिहार उत्तर (आरक्षित) से सुकुमार को उम्मीदवार बनाया गया है. इसी तरह शीतलकुची (आरक्षित) से साबित्री बरमन और दिनहाटा से अजय रॉय को चुनाव मैदान में उतारा गया है. बीजेपी की इस सूची में कई पुराने विधायकों को टिकट नहीं दिया गया, जिससे पार्टी के भीतर भी चर्चा का माहौल बन गया है.

8 मौजूदा विधायकों का कटा पत्ता

बीजेपी सूत्रों के अनुसार, जिन 144 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए गए हैं, उनमें से 48 सीटें पहले बीजेपी के पास थीं. हालांकि इस बार पार्टी ने अपने कई मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया है. जानकारी के मुताबिक 40 निवर्तमान विधायकों को ही दोबारा मौका मिला है, जबकि आठ विधायकों ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया या उन्हें टिकट नहीं मिला. जिन आठ सीटों पर उम्मीदवार बदले गए हैं, उनमें तीन सीटें उत्तर बंगाल, तीन रहबंगा क्षेत्र और दो दक्षिण बंगाल की हैं.

कुछ सीटों पर उम्मीदवार बदलने का बीजेपी का फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला रहा. सबसे बड़ा आश्चर्य दक्षिण दिनाजपुर जिले की बालुरघाट सीट पर देखने को मिला. यहां से 2021 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले अर्थशास्त्री अशोक लाहिरी को इस बार टिकट नहीं दिया गया. उल्लेखनीय है कि वे प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार भी रह चुके हैं और पार्टी में उनका प्रभाव माना जाता रहा है. आनंद बाजार पत्रिका के मुताबिक, कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उनसे अलग से बातचीत की थी, जिससे उनके टिकट मिलने की संभावना मानी जा रही थी. लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम नहीं होने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है.

सीपीएम में भी उहापोह!

दूसरी ओर वाम मोर्चे की सबसे बड़ी पार्टी सीपीएम ने भी अपनी प्रारंभिक उम्मीदवार लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें 192 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए हैं. हालांकि इस सूची के सामने आने के बाद पार्टी के भीतर कुछ सीटों को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं. खास तौर पर मुर्शिदाबाद जिले की रानीनगर सीट पर उम्मीदवार घोषित न किए जाने से पार्टी के अंदर चर्चा तेज हो गई है. पिछले लोकसभा चुनाव में इसी सीट पर पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम को बढ़त मिली थी, इसलिए माना जा रहा था कि वे विधानसभा चुनाव में इसी सीट से मैदान में उतर सकते हैं.

लेकिन पार्टी की एक आंतरिक नीति के कारण मामला फिलहाल अटका हुआ है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बार राज्य सचिव मंडल के अधिकांश सदस्य चुनाव नहीं लड़ेंगे और केवल मीनाक्षी मुखर्जी को ही अपवाद के तौर पर हुगली जिले की उत्तरपाड़ा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है. इसी नीति के कारण रानीनगर और टॉलीगंज सीटों पर उम्मीदवार घोषित नहीं किए गए हैं. हालांकि पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि अगर वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती टॉलीगंज सीट से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं, तो मोहम्मद सलीम के लिए रनिनगर से चुनाव लड़ने का रास्ता भी साफ हो सकता है.

खबर है कि सुजन चक्रवर्ती को टॉलीगंज सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन उन्होंने फिलहाल चुनाव लड़ने में रुचि नहीं दिखाई है. उनके करीबी नेताओं का कहना है कि वे संगठन और प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं, न कि चुनावी मैदान में उतरना. हालांकि पार्टी के कई नेता मानते हैं कि अंततः वे पार्टी के निर्णय का सम्मान करेंगे.

बंगाल में कब होगी वोटिंग?

चुनाव आयोग ने बंगाल में दो चरण में चुनाव कराने की घोषणा कर दी है. इसमें पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा. इसके लिए 30 मार्च को अधिसूचना लिस्ट होगी, जबकि नामांकन प्रक्रिया 30 मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगी. 7 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अप्रैल तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे. चुनाव की पूरी प्रक्रिया के बाद 4 मई को मतगणना कर नतीजे घोषित किए जाएंगे.

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