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कानपुर के गोविंद नगर स्थित पराग डेयरी प्लांट को 13 साल बाद आधुनिक तकनीक के साथ फिर से शुरू किया जा रहा है. करीब 160 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस प्लांट में रोज़ 4 लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग होगी, जिससे कानपुर मंडल के करीब एक लाख किसानों और पशुपालकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.

कानपुर. कानपुर नगर में गोविंद नगर स्थित पराग डेयरी प्लांट करीब 13 साल बाद फिर से शुरू होने जा रहा है. आधुनिक तकनीक से तैयार किया गया यह प्लांट अब कानपुर मंडल के डेयरी सेक्टर को नई रफ्तार देने वाला है. लगभग 160 करोड़ रुपये की लागत से इसका आधुनिकीकरण किया गया है और अप्रैल महीने से इसे शुरू करने की तैयारी चल रही है. प्लांट शुरू होने के बाद यहां रोज करीब चार लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग की जा सकेगी. यह डेयरी प्लांट कानपुर और आसपास के जिलों के दुग्ध उत्पादक किसानों के लिए बड़ा सहारा साबित होगा. अनुमान है कि कानपुर मंडल के करीब एक लाख किसानों और पशुपालकों को इससे सीधा लाभ मिलेगा. गांवों में बनाए गए कलेक्शन सेंटरों से दूध इकट्ठा कर इस प्लांट तक लाया जाएगा, जहां उसकी जांच और प्रोसेसिंग की जाएगी. इससे किसानों को अपने दूध का अच्छा दाम और समय पर भुगतान मिलने की उम्मीद है.

विदेशी तकनीक से तैयार हुआ आधुनिक प्लांट
पराग डेयरी के इस प्लांट को पूरी तरह आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है. इसमें जापान और जर्मनी से मंगाई गई अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं, जिससे दूध की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग तेज और सुरक्षित तरीके से हो सकेगी. प्लांट में दूध को पैक करने के साथ-साथ मिल्क पाउडर, पनीर और देसी घी का बड़े पैमाने पर उत्पादन भी किया जाएगा. नई व्यवस्था के तहत यहां रोज करीब 1.50 लाख लीटर पैक्ड दूध तैयार किया जाएगा. इसके अलावा करीब 20 मीट्रिक टन मिल्क पाउडर, एक टन पनीर और आठ टन देसी घी बनाने की क्षमता भी विकसित की गई है. इससे पराग ब्रांड के उत्पादों की उपलब्धता भी बाजार में बढ़ेगी.

अत्याधुनिक लैब में होगी दूध की जांच
प्लांट में गुणवत्ता को लेकर खास ध्यान रखा गया है, इसके लिए यहां अत्याधुनिक केंद्रीय प्रयोगशाला बनाई गई है. गांवों से आने वाले दूध की पहले वैज्ञानिक तरीके से जांच होगी और लैब टेस्ट में सही पाए जाने के बाद ही उसे प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाएगा. इससे उपभोक्ताओं तक शुद्ध और सुरक्षित दूध पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.

1962 में शुरू हुआ था पराग डेयरी प्लांट
कानपुर महानगर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गोविंद नगर का पराग डेयरी प्लांट वर्ष 1962 में स्थापित किया गया था और लंबे समय तक यह पूरे क्षेत्र का प्रमुख डेयरी केंद्र रहा. लेकिन वर्ष 2013 में विभिन्न कारणों से इसका संचालन बंद हो गया था. इसके बाद राज्य सरकार ने इसे दोबारा शुरू करने के लिए आधुनिकीकरण का फैसला लिया. नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की इकाई इंडियन डेयरी मशीनरी कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से इसका पुनर्निर्माण कराया गया.अब आधुनिक तकनीक और नई सुविधाओं के साथ यह प्लांट दोबारा शुरू होने जा रहा है. इससे न केवल किसानों को फायदा मिलेगा बल्कि कानपुर मंडल में डेयरी उद्योग को भी नई ताकत मिलने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि प्लांट के शुरू होने से क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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