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Inflation Data : खुदरा महंगाई के आंकड़ों ने एक बार फिर डराना शुरू कर दिया है. फरवरी में यह सवा 3 फीसदी के आसपास जा पहुंची है. खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से इस महंगाई का ज्‍यादा व्‍यापक असर दिख रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि तेल और गैस का संकट और बढ़ा तो महंगाई के आंकड़े भी निश्चित रूप से बढ़ेंगे.

तेल में आग लगते ही भड़क उठी महंगाई डायन! फरवरी में सवा 3 फीसद पहुंचीZoom

फरवरी में खुदरा महंगाई का आंकड़ा जनवरी से काफी बढ़ चुका है.

नई दिल्‍ली. कच्‍चे तेल की कीमतों में आग पकड़नी ही शुरू हुई है कि महंगाई रूपी डायन ने अपना मुंह फैलाना शुरू कर दिया. फरवरी के आंकड़े बताते हैं कि खुदरा महंगाई का आंकड़ा रिजर्व बैंक के तय दायरे से बाहर जाता दिख रहा है. जनवरी के मुकाबले इसमें करीब 1 फीसदी का उछाल दिख रहा है. महंगाई का यह आंकड़ा 2024 की नई शृंखला वाले आधार पर टिकी है. फरवरी में महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण खाने-पीने की चीजों में आई बढ़ोतरी को बताया जा रहा है.

राष्‍ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों में बताया गया है कि देश में खुदरा महंगाई फरवरी में बढ़कर 3.21 फीसदी हो गई. जनवरी में यह 2.74 फीसदी के स्तर पर रही थी. महंगाई के यह आंकड़े आधार वर्ष 2024 वाली नई श्रृंखला पर आधारित हैं. एनएसओ ने बताया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर फरवरी में खाद्य महंगाई बढ़कर 3.47 फीसदी हो गई जो जनवरी में 2.13 फीसदी थी.

किन चीजों ने बढ़ाई खुदरा महंगाई
इस दौरान चांदी, सोना, हीरा और प्लैटिनम के आभूषण, नारियल-खोपरा, टमाटर और फूलगोभी की कीमतों में सबसे अधिक तेजी रही. दूसरी ओर लहसुन, प्याज, आलू, अरहर और लीची की कीमतों में नरमी देखी गई. ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.37 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 3.02 फीसदी दर्ज की गई. इसका मतलब है कि फरवरी में शहरों के मुकाबले गांव में महंगाई का असर ज्‍यादा देखने को मिला. यही कारण है कि इस बार महंगाई का असर कहीं ज्‍यादा व्‍यापक दिख रहा है.

क्‍यों मायने रखते हैं खुदरा महंगाई के आंकड़े
खुदरा महंगाई सीधे तौर पर ग्राहकों की खपत और खर्च को बताती है. यही वजह है कि रिजर्व बैंक अपनी पॉलिसी बनाते समय खुदरा महंगाई पर ही फोकस रखता है. अगर खुदरा महंगाई उसके तय दायरे के बाहर चली जाती है तो फिर कर्ज के सस्‍ता होने की उम्‍मीद भी कम हो जाएगी. रेपो रेट में कोई भी कटौती तभी संभव है, जबकि खुदरा महंगाई का आंकड़ा रिजर्व बैंक की ओर से तय किए गए मानक यानी दायरे के भीतर रहे.

आगे और बढ़ने की आशंका
खुदरा महंगाई भारत जैसे देश में काफी हद तक ईंधन पर निर्भर करती है. जैसा कि अभी माहौल है जहां तेल और गैस महंगे होते जा रहे हैं तो इससे फैक्‍ट्री में तैयार प्रोडक्‍ट के साथ-साथ फल-सब्जियों की सिंचाई और उनका माल भाड़ा भी बढ़ने की आशंका है. इसका सीधा असर आने वाले समय में खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर भी दिखेगा. विशेषज्ञों का भी मानना है कि आने वाले समय में खुदरा महंगाई के आंकड़े और भी बढ़ सकते हैं.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

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