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Gorakhpur News: गोरखपुर में एक ऐसा होटल है, जहां के नॉनवेज का स्वाद लेने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. यहां मिलने वाला सिंधी स्टाइल नॉनवेज आज भी लोगों को अपने खास स्वाद से आकर्षित करता है. यही वजह है कि वर्षों बाद भी इस दुकान पर खाने वालों की भीड़ देखने को मिलती है.

गोरखपुर: शहर में खाने-पीने के शौकीनों के लिए कई जगहें मशहूर हैं, लेकिन जिला अस्पताल रोड के पास स्थित दानाराम सिंधी होटल की कहानी सिर्फ स्वाद की नहीं, बल्कि इतिहास और विरासत की भी है. यहां मिलने वाला सिंधी स्टाइल नॉनवेज आज भी लोगों को अपने खास स्वाद से आकर्षित करता है. यही वजह है कि वर्षों बाद भी इस दुकान पर खाने वालों की भीड़ देखने को मिलती है.

पाकिस्तान से शुरू हुआ सफर

इस होटल की कहानी भारत के बंटवारे के बाद शुरू होती है. होटल चलाने वाले प्रीतम दास आहूजा बताते हैं कि उनके बाबा पाकिस्तान में डॉक्टर थे. साल 1950 में परिवार भारत आ गया और गोरखपुर को अपना ठिकाना बना लिया. नई जगह और नई जिंदगी की शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन उनके बाबा ने हिम्मत नहीं हारी.

डॉक्टरी छोड़कर उन्होंने गोरखपुर में एक छोटा सा रेस्टोरेंट शुरू किया. शुरुआत भले ही छोटी थी, लेकिन उनके हाथों का स्वाद इतना खास था कि धीरे-धीरे लोग दूर-दूर से यहां आने लगे. खासकर सिंधी स्टाइल में तैयार किया गया नॉनवेज लोगों की पहली पसंद बन गया.

खास मसाले से बनता है अलग स्वाद

प्रीतम दास बताते हैं कि उनके बाबा के नॉनवेज की सबसे बड़ी खासियत स्पेशल मसाले थे. वह दुसरे जगह से खड़े मसाले मंगवाते थे और फिर उन्हें एक खास तरीके से पीसकर तैयार करते थे. इन मसालों को एक अलग अंदाज से मिलाकर वह नॉनवेज की हर डिश बनाते थे. यही वजह थी कि जो भी एक बार उनके हाथों का बना खाना खाता, वह दोबारा जरूर आता. उस दौर में शहर में शायद ही कोई ऐसा हो, जिसने दानाराम होटल का स्वाद न चखा हो.

पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही विरासत

समय के साथ यह स्वाद और विरासत अगली पीढ़ियों तक पहुंचती चली गई. प्रीतम दास बताते हैं कि उनके बाबा ने मसाले तैयार करने का तरीका अपने बच्चों को सिखाया और वही परंपरा आज भी जारी है. आज भी ‘दानाराम सिंधी होटल’ में उसी पारंपरिक अंदाज से मसाले तैयार किए जाते हैं और उन्हीं से नॉनवेज की अलग-अलग वैरायटी बनाई जाती है.

गोरखपुर में भले ही कई नए रेस्टोरेंट खुल गए हों, लेकिन दानाराम सिंधी होटल का स्वाद आज भी लोगों को खींच लाता है. पुराने ग्राहक यादों के साथ यहां आते हैं, तो नई पीढ़ी इस ऐतिहासिक स्वाद को चखने पहुंचती है.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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