Image Slider

नई दिल्ली. पुरानी कहावत  हैं कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, लेकिन पिछले कुछ सालों में एक ‘निश्चित’ बात यह थी कि जहाँ भारतीय पैसा होगा, वहाँ पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं होगा  फिर चाहे वो दक्षिण अफ्रीका की SA20 हो या यूएई की. LT20, सरहद की लकीरें मैदान से ज्यादा नीलामी की मेज पर गहरी नजर आती थीं लेकिन गुरुवार  को लंदन की चकाचौंध में सनराइजर्स लीड्स ने जो गुगली डाली, उसने न केवल बल्लेबाजों को, बल्कि क्रिकेट के ‘पॉलिटिकल पंडितों’ को भी क्लीन बोल्ड कर दिया.

सनराइजर्स लीड्स ने द हंड्रेड के पहले ऐतिहासिक ऑक्शन में पाकिस्तान के स्पिनर अबरार अहमद को £190,000 (लगभग ₹2.34 करोड़) में खरीदकर क्रिकेट जगत को चौंका दिया है.  सन टीवी नेटवर्क (सनराइजर्स हैदराबाद के मालिक) के स्वामित्व वाली इस टीम ने इस साइनिंग के साथ उस अघोषित प्रतिबंध को तोड़ दिया है, जिसके तहत दुनिया भर की लीगों में भारतीय मालिकों वाली टीमें पाकिस्तानी खिलाड़ियों को साइन करने से बचती रही हैं.

काव्या मारन ने ये क्या कर दिया 

अगर आप सोच रहे थे कि क्रिकेट केवल चौकों-छक्कों का खेल है, तो आपको अपनी याददाश्त थोड़ी तेज करनी चाहिए. यह ‘रणनीतिक चुप्पी’ का भी खेल है सालों से आईपीएल के फ्रेंचाइजी मालिकों ने एक ऐसी ‘दीवार’ खड़ी कर रखी थी, जिसे तोड़ना चीन की दीवार फांदने से भी मुश्किल लग रहा था नियम सीधा था टीम हमारी, पैसा हमारा, तो खिलाड़ी भी हमारे ही ‘पसंद’ के होंगे.  लेकिन सनराइजर्स लीड्स की मालकिन काव्या मारन ने शायद इस बार ‘नो-गो ज़ोन’ का बोर्ड पढ़ना भूल गईं या फिर उन्होंने ठान लिया था कि स्पिन का जादू सरहद नहीं देखता. जब अबरार अहमद का नाम आया, तो कई दिग्गजों को लगा होगा कि यह सिर्फ ‘फॉर्मेलिटी’ है, कोई बोली नहीं लगाएगा पर सनराइजर्स ने न सिर्फ बोली लगाई, बल्कि £190,000 की मोटी रकम देकर अबरार को अपने पाले में कर लिया.

अबरार पर हरोगी रार!

यह नजारा वैसा ही था जैसे किसी पुरानी रंजिश वाले दो परिवारों के बच्चे चुपके से हाथ मिला लें और पूरा मोहल्ला बस देखता रह जाए.  जहाँ बाकी भारतीय मालिकाना हक वाली टीमें (जैसे एमआई लंदन या मैनचेस्टर सुपर जायंट्स) ‘सावधानी’ बरत रही थीं, वहीं सनराइजर्स ने ‘ऑरेंज आर्मी’ का परचम फहराते हुए बता दिया कि ‘लीड्स’ में खेल सिर्फ क्रिकेट का होगा, कूटनीति का नहीं. अबरार अहमद, जिन्हें उनकी रहस्यमयी फिरकी के लिए जाना जाता है, अब लीड्स के मैदान पर उसी टीम की जर्सी पहनेंगे जिसकी मुख्य शाखा हैदराबाद में बैठती है.  यह उन लोगों के लिए भी एक तंज है जो मान बैठे थे कि लीग क्रिकेट में राष्ट्रवाद और नफ़रत का कॉकटेल ही सबसे ज्यादा बिकता है.

क्या यह एक नई शुरुआत है? या बस एक ‘एक्सीडेंटल’ साइनिंग? खैर, जो भी हो, सनराइजर्स ने यह साबित कर दिया है कि कभी-कभी खेल को खेल रहने देना ही सबसे बड़ी जीत होती है.  अब देखना यह है कि क्या बाकी ‘बड़े भाई’ भी इस छोटे भाई (लीड्स) के नक्शेकदम पर चलेंगे, या फिर ‘बॉयकॉट’ का पुराना टेप ही बजता रहेगा.

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||