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बिहार में आज आपको ऐसे एक स्कूल लेकर चलते हैं जिसे बेगूसराय का सांपशाला कहा जाता है. अगर जुगाड़ का उदाहरण देखना हो तो इस स्कूल का रुख कर सकते हैं. यहां पढ़ते हुए बच्चों को देखकर लगेगा नेशनल एजुकेशन पॉलिसी नहीं, नेचुरल एजुकेशन पॉलिसी लागू हो. प्रशासन ने व्यवस्था ऐसी बना डाली, जहां बच्चों की जिंदगी पढ़ने के बाद बर्बाद हो रही है.

बेगूसराय: सत्ता चाहिए बार-बार पर बच्चों का भविष्य कब बनेगा सरकार? लोकल 18 पड़ताल में आज आपको ऐसे ही एक स्कूल लेकर चलते हैं जिसे बेगूसराय का सांपशाला कहा जाता है. बिहार में यह स्कूल ऐसा है जहां जुगाड़ तकनीक से शिक्षक बच्चों को ज्ञान देने की कोशिश में अपने वेतन प्राप्त करने का तरीका ढूंढ निकाला है. यह आधुनिक सांपशाला नीतीश सरकार के 20 वर्षों के प्रयास से बदले स्कूली व्यवस्था का सबसे बड़ा सबूत समझा जा सकता है. यहां से नीतीश के विधायक मंत्री तक बनें और आज भी सत्ता में हैं पर व्यवस्था ऐसी बना डाली, जहां बच्चों की जिंदगी पढ़ने के बाद बर्बाद हो रही है.

बेगूसराय में अगर जुगाड़ का उदाहरण देखना हो तो इस स्कूल का रुख कर सकते हैं. यहां पढ़ते हुए बच्चों को देखकर लगेगा नेशनल एजुकेशन पॉलिसी नहीं, नेचुरल एजुकेशन पॉलिसी लागू हो. विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे राजनंदनी कुमारी बताती हैं कि स्कूल में सांप आ जाता है… उधर से स्कूल आने में डर लगता है. युग कुमार बताते हैं पढ़ाई में मन लगता है लेकिन एक ही कमरे में तीसरी चौथी पांचवी के बच्चे बैठकर पढ़ते हैं क्या सीखेंगे. अमोली कुमारी बताती हैं हमारे विद्यालय में सांप भी रहता है. पढ़ने में डर भी लगता है. प्रिज्म जायसवाल नाम का छात्र कहता है स्कूल जब आते हैं तो डर जाते हैं क्लास रूम में भी सांप आ जाता है.

इस स्कूल की फाइल कहां दबी है?
विद्यालय के प्राचार्य बताते हैं 150 बच्चों का नामांकन किया गया है. रोजाना 80 से ज्यादा बच्चे स्कूल आते हैं. कमरे की कमी है. एक कमरे में दो क्लास तो दूसरे कमरे में तीन क्लास चलाना पड़ती है. विद्यालय के एक साइड जंगल और एक साइड से सांप के खतरे से बच्चे परेशान हैं. विभाग को पत्र भी लिखा गया. यहां सवाल है इस स्कूल की फाइल कहां दबी हुई है? क्या प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी मंझौल सब मिलकर इस इलाके की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर रहे हैं?

विधायक का ध्यान किधर है..
यहां बच्चे किताबें खोलते हैं पर पढ़ाई नहीं होती. शिक्षक कितने स्कूल आते हैं कितने बच्चों को पढ़ाते हैं इसकी जिम्मेदारी किसी के पास नहीं. इस इलाके के विधायक अभिषेक आनंद और उसके परिवार को सत्ता चाहिए. क्या इस वक्त विद्यालय में नेताओं के बच्चे पढ़ने आएंगे? क्या इस विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक, BEO, BDO, SDM या फिर डीएम के बच्चें यहां पढ़ने के लिए एक भी दिन आ सकते हैं? 20 वर्षों से बिहार पर नीतीश की सरकार है पर स्कूल आज तक जुगाड़ तकनीक से चलता आ रहा है. अब इंतजार करना होगा कि विद्यालय की व्यवस्था सरकार बदलने से पहले बदल पाती है या नहीं.

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Mohd Majid

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