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नई दिल्ली: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अब सूरज की ओर देख रहा है. प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 5 मार्च 2026 तक देश भर में 25,02,217 घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं. यह आंकड़ा महज एक संख्या नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों के बिजली बिल जीरो होने की शुरुआत है. सरकार ने इस मिशन को सफल बनाने के लिए तिजोरी खोल दी है. वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 14,585.29 करोड़ रुपए इस योजना पर खर्च किए जा चुके हैं. पिछले साल यह खर्च करीब 7,822 करोड़ रुपए था, जो दिखाता है कि योजना की रफ्तार दोगुनी हो चुकी है.

डिमांड में भारी उछाल, 63 लाख से ज्यादा आवेदन

राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, नेशनल पोर्टल पर अब तक 63,26,125 लोगों ने सोलर सिस्टम के लिए आवेदन किया है. यह एक ‘डिमांड-ड्रिवन’ योजना है. इसका मतलब है कि कोई भी घरेलू उपभोक्ता, जिसके पास वैध बिजली कनेक्शन है, वह पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकता है. गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल और राजस्थान जैसे राज्यों ने इस योजना को अपनाने में सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है.

पर्यावरण और इकोनॉमी को डबल फायदा

सरकार का विजन बहुत बड़ा है. अगर एक करोड़ घरों में यह सिस्टम लग जाता है, तो देश में 1000 अरब यूनिट रिन्यूएबल बिजली पैदा होगी. इससे न केवल आम आदमी का पैसा बचेगा, बल्कि अगले 25 सालों में 720 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी. यह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत की जंग में एक बड़ा हथियार साबित होगा.

रिन्यूएबल एनर्जी में भारत का दबदबा

सिर्फ छतों पर ही नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर भी भारत सौर ऊर्जा में नाम कमा रहा है. 31 दिसंबर 2025 तक देश की कुल नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित क्षमता 266.78 गीगावाट तक पहुंच गई है. इसमें अकेले सौर ऊर्जा का हिस्सा 135.81 गीगावाट है. सरकार अब नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन पर भी काम कर रही है, ताकि भारत भविष्य की ऊर्जा का ग्लोबल हब बन सके.

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