बॉलीवुड बेस्ट सस्पेंस फिल्म: बॉलीवुड के इतिहास में ऐसी कई फिल्में बन चुकी हैं, जो सस्पेंस से भरपूर रही हैं. हम जब भी सस्पेंस फिल्मों की बात करते हैं तो सबसे पहले हमारे मन में अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम’ का नाम आता है. इसमें कोई शक नहीं कि यह एक ऐसी फिल्म थी, जिसने आखिरी वक्त तक दर्शकों को बांधे रखा था, लेकिन आज हम आपको एक और ऐसी ही फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं, जो साल 2001 में रिलीज हुई थी और अगर उस फिल्म की तुलना ‘दृश्यम’ और ‘अंधाधुन’ से की जाए तो रिजल्ट काफी चौंकाने वाला हो सकता है.
नई दिल्ली. फिल्मों का एक जॉनर ऐसा है, जिसके बहुत सारे दर्शक हैं और वह जॉनर है सस्पेंस.जी हां, सस्पेंस फिल्मों को पसंद करने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा है, इसलिए हमेशा से देखा गया है कि अगर ऐसी फिल्में अच्छे से बनाई जाए तो बॉक्स ऑफिस पर उसका हिट होना तय है. ऐसी फिल्में बहुत ही कम फ्लॉप होती हैं, लेकिन सस्पेंस से भरपूर फिल्म को बनाना आसान भी नहीं है.
जब कभी भी सस्पेंस फिल्मों की बात आती है, तो कुछ लोगों के नाम हमेशा सामने आते हैं. अब वो चाहे अब्बास मस्तान हों या फिर विक्रम भट्ट, लेकिन आज हम बात करेंगे विक्रम भट्ट की उस फिल्म की जो आज से 25 साल पहले सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसका नाम था ‘कसूर’. जी हां, वही ‘कसूर’ जो बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे तो गाड़े ही थे, साथ ही साथ इस फिल्म के सारे गाने भी सुपरहिट हुए थे.
‘कितनी बेचैन होके’, ‘कोई तो साथी चाहिए’ और ‘जिंदगी बन गए हो तुम’… फिल्म ‘कसूर’ के सारे गाने आज भी लोगों के बीच काफी मशहूर हैं. किसी ने नहीं सोचा था कि उस दौर का एक नया एक्टर आफताब शिवदासानी ‘कसूर’ में इतनी कमाल की एक्टिंग करेगा और रातोंरात लोगों के दिलों में बस जाएगा, लेकिन आफताब कुछ ऐसा ही कर दिखाया. अगर हम आज ‘दृश्यम’ और ‘अंधाधुन’ जैसी सस्पेंस फिल्मों की बात करते हैं, तो आज से 25 साल पहले हम ‘कसूर’ की बातें किया करते थे.
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‘कसूर’ ने सस्पेंस फिल्मों को एक नई पहचान दिलाई थी, जो रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर छा गई थी. विकिपीडिया के अनुसार, इस फिल्म को बनाने में मेकर्स के लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च हुए थे और वर्ल्डवाइड इसका टोटल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगभग 14 करोड़ रुपये रहा था. अगर मंहगाई दर के हिसाब से देखें तो 2026 में यह 14 करोड़ का आंकड़ा लगभग 67 से 70 करोड़ के आसपास पहुंचेगा.
बता दें, ‘कसूर’ विक्रम भट्ट द्वारा निर्देशित और मुकेश भट्ट की विशेष फिल्म्स द्वारा निर्मित थी. इसमें आफताब शिवदासानी के साथ लिसा रे लीड एक्ट्रेस के रूप में नजर आई थीं, जिन्होंने अपनी हिंदी फिल्म की शुरुआत की थी. फिल्म में अपूर्व अग्निहोत्री, इरफान खान और आशुतोष राणा भी सपोर्टिंग रोल में नजर आए थे. यह फिल्म आज भी नदीम-श्रवण द्वारा रचित साउंडट्रैक के लिए जानी जाती है.
फिल्म कहानी की बात करें तो फिल्म की शुरुआत एक अमीर और जाने-माने पत्रकार शेखर सक्सेना (आफताब शिवदासानी) की पत्नी प्रीति के मर्डर से होती है. इंस्पेक्टर लोखंडे (आशुतोष राणा) केस की जांच करते हैं और शेखर पर मर्डर का इल्जाम लगाते हैं, और कहते हैं कि उनके पास उसे अरेस्ट करने और सजा दिलाने के लिए काफी सबूत हैं. हालांकि, कोर्ट से बेल मिलने पर, शेखर अपने वकील से अपना केस लड़ने के लिए कहता है; लेकिन, उसका वकील उसे बताता है कि वह उसका केस नहीं लड़ पाएगा क्योंकि वह एक कॉर्पोरेट लॉयर है और सिर्फ सिविल केस लड़ता है. वह शेखर को सिमरन भार्गव (लिसा रे) से अपना केस लड़ने के लिए कहने का सुझाव देता है, जो उसकी फर्म में एक काबिल क्रिमिनल लॉयर है.
शेखर सिमरन को अपना केस लड़ने के लिए मनाने के लिए उसके घर जाता है. सिमरन शेखर से कहती है कि वह उसका बचाव तभी करेगी जब उसे यकीन हो जाएगा कि वह बेगुनाह है. सिमरन एक ऐसे केस को लेकर अपने अंदर के डर से लड़ रही है जिसमें उसने एक आदमी को ऐसे जुर्म के लिए सजा दिलाई थी जो उसने किया ही नहीं था. जब उसे पता चलता है कि उस बेगुनाह आदमी ने कस्टडी में सुसाइड कर लिया था तो उसका गिल्ट और बढ़ जाता है. इसके आगे क्या होता है, वो आपको पूरी फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा.
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