Last Updated:
Ber Farming Tips: बेर की बागवानी करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है. दरअसल, अक्सर मेहनत के बावजूद फलों का आकार छोटा रह जाता है या उनमें वह मिठास और चमक नहीं आ पाती, जिसकी बाजार में कीमत भी अच्छी नहीं मिलती है. जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने कुछ ऐसी विशेष वैज्ञानिक तकनीकों और पोषक तत्वों के बारे में बताया है, जिनसे बेर का साइज दोगुना किया जा सकता है और उनमें शहद जैसी मिठास भरी जा सकती है. अगर आप भी अपनी फसल को फटने से बचाना और क्वालिटी फ्रूटिंग के जरिए मुनाफा बढ़ाना चाहते हैं, तो इन खास टिप्स को जरूर जानें.
बेर की बागवानी करने वाले किसानों के लिए यह समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दौरान फलों का विकास और उनमें मिठास बनने की प्रक्रिया शुरू होती है. अक्सर सही पोषण न मिलने के कारण बेर का आकार छोटा रह जाता है या उनमें वह चमक नहीं आ पाती जो बाजार में अच्छे दाम दिला सके. इसलिए इस खबर में हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताएंगे जो आपकी इस परेशानी को दूर करेगी.
फलों का आकार और चमक बढ़ाने में पोटैशियम की मुख्य भूमिका होती है. जब बेर मटर के दाने के बराबर हो जाएं, तब 00:00:50 पोटैशियम सल्फेट का छिड़काव करें. यह तत्वों के परिवहन में मदद करता है, जिससे फल तेजी से फूलते हैं. इसके अलावा, मिट्टी में म्यूटरेट ऑफ पोटाश देने से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है और फल आकर्षक बनते हैं.
जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि मिठास बढ़ाने और फलों को फटने से बचाने के लिए ‘बोरोन’ एक सूक्ष्म पोषक तत्व है जो संजीवनी की तरह काम करता है. फल सेट होने के बाद 2 ग्राम प्रति लीटर की दर से बोरोन का स्प्रे करें. यह शर्करा के संचयन में मदद करता है, जिससे बेर का स्वाद फीका नहीं रहता और वे रसीले व मीठे हो जाते हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google
बेर के आकार के लिए नमी का संतुलन जरूरी है. फल बढ़ते समय मिट्टी में नमी की कमी न होने दें, अन्यथा फल सिकुड़ सकते हैं. हालांकि, ध्यान रहे कि फल पकने के आखिरी 10-15 दिनों में सिंचाई कम कर देनी चाहिए. अंतिम चरण में ज्यादा पानी देने से मिठास कम हो जाती है और फल जल्दी खराब होने लगते हैं.
एक ही टहनी पर बहुत अधिक फल होने से पोषण बंट जाता है, जिससे सभी फल छोटे रह जाते हैं. अगर पेड़ पर फल बहुत ज्यादा हों, तो कुछ कमजोर फलों को हाथ से तोड़कर हटा दें. इससे बचे हुए फलों को अधिक पोषक तत्व मिलेंगे और उनका आकार दोगुना तक बढ़ सकता है. यह तकनीक ‘क्वालिटी फ्रूटिंग’ के लिए जरूरी है.
रसायनों के साथ-साथ जैविक खाद फलों के स्वाद में देसी सुगंध और प्राकृतिक मिठास भरती है. अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग करें. महीने में एक बार जीवामृत का घोल जड़ों में देने से मिट्टी के सूक्ष्मजीव सक्रिय होते हैं, जो सूक्ष्म पोषक तत्वों को फलों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं.
फल मक्खी (Fruit Fly) बेर की सबसे बड़ी दुश्मन है. यह फल के अंदर अंडे देती है जिससे फल सड़ने लगते हैं और उनकी ग्रोथ रुक जाती है. इसके बचाव के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाएं और प्रभावित फलों को नष्ट कर दें. स्वस्थ फल ही अपनी पूरी क्षमता तक विकसित हो पाते हैं, इसलिए कीटनाशकों का समय पर और सीमित उपयोग करें.
अगर आप व्यावसायिक स्तर पर खेती कर रहे हैं, तो ‘प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर्स’ का सहारा ले सकते हैं. जिब्बेरेलिक एसिड (GA3) का बहुत कम मात्रा में छिड़काव कोशिका विभाजन को बढ़ाता है, जिससे फलों का आकार प्राकृतिक रूप से बड़ा होता है. हालांकि, इनका प्रयोग हमेशा विशेषज्ञों की सलाह पर और सही अनुपात में ही करना चाहिए ताकि फल की गुणवत्ता न बिगड़े.
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



