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होमताजा खबरकृषिगर्मी के मौसम आते ही आम की फसलों पर मंडराया संकट, जानें एक्सर्ट से ये सलाह

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किसानों का कहना है कि आम के मंजर को फल में बदलने के लिए रात और सुबह में हल्की ठंडक की आवश्यकता होती है. दोपहर की तेज धूप और गर्म हवाएं ‘परागकण’ (Pollination) की प्रक्रिया को बाधित कर रही हैं, जिससे फल बनने से पहले ही बौर काला होकर गिर रहा है.

सीतामढ़ी जिले में मार्च के महीने में ही पारा 30C के पार पहुंच जाने से आम के बागानों में हड़कंप मच गया है. वर्तमान में आम के पेड़ों पर मंजर (बौर) पूरी तरह आ चुके हैं. लेकिन असामान्य गर्मी के कारण ये सूखकर झड़ने लगे हैं. किसानों का कहना है कि आम के मंजर को फल में बदलने के लिए रात और सुबह में हल्की ठंडक की आवश्यकता होती है. दोपहर की तेज धूप और गर्म हवाएं ‘परागकण’ (Pollination) की प्रक्रिया को बाधित कर रही हैं, जिससे फल बनने से पहले ही बौर काला होकर गिर रहा है.

उत्पादन पर भारी गिरावट की आशंका
​सीतामढ़ी जिले के लिए आम केवल एक फल नहीं, बल्कि हजारों किसानों की आजीविका का मुख्य स्रोत है. यहां हर साल लगभग 35,000 से 39,000 टन आम का उत्पादन होता है. यदि तापमान में वृद्धि का यही सिलसिला जारी रहा, तो इस वर्ष उत्पादन में 30% से 40% तक की गिरावट आ सकती है. बागान मालिकों का मानना है कि मंजर झड़ने से पेड़ों पर फलों की सेटिंग कम होगी, जिसका सीधा असर बाजार में आम की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ेगा.

वैज्ञानिकों की सलाह:
सिंचाई और पोषण प्रबंधन​कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने इस संकट से निपटने के लिए किसानों को ‘नमी प्रबंधन’ पर जोर देने को कहा है. उन्होंने सुझाव दिया है कि बागानों में हल्की सिंचाई शाम के समय करें ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे और वाष्पीकरण कम हो. इसके अलावा, मंजर को मजबूती देने के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micro-nutrients) का छिड़काव करना चाहिए। विशेष रूप से बोरॉन और अल्फा नेफ्थलीन एसिटिक एसिड का संतुलित उपयोग मंजर को गिरने से रोकने में प्रभावी साबित हो सकता है.

आम की फसल पर मंडराया संकट
​कीट नियंत्रण और नियमित निगरानी​गर्मी बढ़ने के साथ ही मंजर पर ‘मधुआ कीट’ (Hopper) और ‘दहिया रोग’ का प्रकोप भी बढ़ जाता है. वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि वे केवल सिंचाई पर ही निर्भर न रहें, बल्कि कीटों के हमले की भी नियमित निगरानी करें. यदि मंजर पर चिपचिपा पदार्थ दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ की सलाह पर कीटनाशक का छिड़काव करें। समय रहते उचित वैज्ञानिक तरीके अपनाकर और कृषि विभाग के संपर्क में रहकर किसान इस प्राकृतिक आपदा के प्रभाव को न्यूनतम कर सकते हैं.

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