-डीसीपी सिटी धवल जायसवाल की सख्त कार्रवाई, दो भाइयों की चल-अचल संपत्ति जब्त
-चार ट्रकों से 15.73 लाख शीशियां बरामद होने के बाद शुरू हुई थी बड़ी जांच
-घोषित आय से कई गुना ज्यादा संपत्ति खरीदने का खुलासा, तस्करी नेटवर्क की जांच जारी
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी करने वाले गिरोह पर शिकंजा कस दिया है। क्राइम ब्रांच और नंदग्राम थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के दो मुख्य आरोपित भाइयों की करीब 12.55 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति फ्रीज कर दी गई है। पुलिस की इस कार्रवाई को डीसीपी सिटी धवल जायसवाल की सख्त कार्यशैली का परिणाम माना जा रहा है, जिन्होंने नशे के कारोबार में लिप्त अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पुलिस के अनुसार सहारनपुर के शास्त्री नगर निवासी विभोर राणा और विशाल सिंह अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर कोडीनयुक्त कफ सिरप की बड़े पैमाने पर तस्करी कर रहे थे। दोनों भाई इस अवैध कारोबार से मोटा मुनाफा कमाकर विभिन्न स्थानों पर संपत्तियां खरीद रहे थे। पुलिस ने जांच के दौरान सहारनपुर में उनके नाम पर खरीदी गई कृषि भूमि, प्लॉट, मकान, ट्रैक्टर और लग्जरी कार समेत कई संपत्तियों की पहचान की, जिन्हें अब फ्रीज कर दिया गया है।
रविवार को पुलिस लाइन्स स्थित परमजीत हॉल में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह की मौजूदगी में बताया कि तीन नवंबर 2025 को पुलिस ने इस गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया था। उस दौरान चार ट्रकों से भारी मात्रा में कोडीनयुक्त कफ सिरप बरामद किया गया था। ट्रकों में बोरों के बीच छिपाकर रखी गई 1150 पेटियों में कुल 15.73 लाख शीशियां बरामद हुई थीं, जिनकी बाजार कीमत करीब तीन करोड़ 40 लाख रुपये आंकी गई थी। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान एक क्रेटा कार, करीब 20 लाख रुपये नकद, दो लैपटॉप, दस मोबाइल फोन, कई फर्जी सिम कार्ड और मुहरें भी बरामद की थीं। जांच में सामने आया कि विभोर राणा के नाम से सहारनपुर में पंजीकृत जीआर ट्रेडिंग कंपनी सहित कई फर्मों के माध्यम से यह गिरोह कफ सिरप इकठ्ठा करता था और बाद में इसे विभिन्न राज्यों में तस्करी के जरिए भेजा जाता था।
पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपितों और उनके परिवार की वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच घोषित आय लगभग 9.08 करोड़ रुपये थी, जबकि इसी अवधि में उन्होंने करीब 22.67 करोड़ रुपये की संपत्ति खरीद ली थी। इससे यह साफ हो गया कि लगभग 13.58 करोड़ रुपये की संपत्ति अवैध तस्करी से कमाए गए धन से खरीदी गई थी। डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सहारनपुर में स्थित कई प्लॉट, मकान, कृषि भूमि, ट्रैक्टर और एक लग्जरी कार समेत कुल 12.55 करोड़ रुपये की संपत्ति को फ्रीज कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई एनडीपीएस अधिनियम 1985 की धारा 68-एफ के तहत की गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस लगातार इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है और उनके खिलाफ भी जल्द ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े एक अन्य सदस्य सौरव त्यागी की संपत्तियों को लेकर कार्रवाई की थी। जांच के दौरान इंदिरापुरम क्षेत्र में उसकी तीन व्यावसायिक दुकानों के साथ-साथ दो वैगनआर कार, एक हुंडई क्रेटा और एक हुंडई ग्रांड आई-10 कार की जांच की गई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि सौरव त्यागी ने भी अपनी घोषित आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की थी।
वित्तीय अभिलेखों की विस्तृत जांच के बाद पुलिस ने अवैध कमाई से खरीदी गई कुल सात संपत्तियों को सीज कर दिया। इनमें चार वाहन और तीन व्यावसायिक दुकानें शामिल थीं। डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने कहा कि नशे के कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि अवैध तरीके से कमाई कर संपत्ति बनाने वालों के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई भी की जाएगी, ताकि अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ी जा सके। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है।
जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा और समाज को इससे होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। डीसीपी ने बताया कि इन संपत्तियों को आरोपियों और उनके परिजनों के नाम पर खरीदा गया था, ताकि अवैध कमाई को छिपाया जा सके। संपत्ति फ्रीज करने के आदेश आरोपियों के परिजनों को भी तामील करा दिए हैं। डीसीपी का कहना है कि मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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