जगन्नाथ मंदिर के गुंबद पर एक बार फिर से ऐसी दुर्लभ घटना देखी गई। पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर के शिखर पर स्थित नीलचक्र और उस पर लहराते 'पतितपावन बाना' पर गुरुवार को एक बाज बैठा हुआ नजर आया। इस घटना ने पिछली घटनाओं की याद ताजा करके लोगों को झकझोर दिया है। एक बाज का वहां आकर बैठना सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक दैवीय संदेश की तरह देखा जा रहा है क्योंकि ऐसा कभी नहीं होता है कि कोई पक्षी गुंबद के आसपास भी उड़े। जगन्नाथ मंदिर ने हर बार भारत में होने वाले अशुभ घटना का संकेत दिया है। पहलगाम हमले के पहले भी ऐसी घटना घटी थी। इस घटना से सांसें थम गई हैं- क्या यह आने वाले समय किसी महाविनाश का संकेत है या कि पूर्व चेतावनी?
उल्लेखनीय है कि 14 अप्रैल 2025 को मंदिर के शिखर पर फहराई गई धर्म ध्वजा को एक पक्षी उठाकर ले गया था इसके बाद 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ और 26 पर्यटकों की मौत हो गई और फिर ऑपरेशन सिंदुर लॉन्च हुआ। अब ध्वजा पर पक्षी का बैठना किस बात कर संकेत है?
भक्ति का तर्क: साक्षात गरुड़ का आगमन
भक्तों का एक बड़ा तबका इस दृश्य को देखकर गदगद है। पौराणिक मान्यताओं में बाज को भगवान विष्णु के वाहन 'गरुड़' का प्रतीक माना जाता है। भक्तों का तर्क है कि कलियुग के इस कठिन दौर में, जब अधर्म बढ़ रहा है, स्वयं गरुड़ देव भगवान जगन्नाथ की रक्षा के लिए नीलचक्र पर विराजमान हुए हैं। पुरी के मठों में इसे एक 'दिव्य सुरक्षा चक्र' और शुभ संकेत के रूप में परिभाषित किया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि जगत के स्वामी की कृपा अभी भी धरती पर बनी हुई है।
भविष्य मालिका की चेतावनी: संकट के बादल?
भविष्य मालिका में भविष्य को लेकर जो भविष्वाणियां की गई है उसका आधार जगन्नाथ पुरी के मंदिर के भीतर और आसपास होने वाली घटनाओं से जोड़कर बताया गया है। जैसे पहले कहा गया था कि मंदिर से पत्थर गिरेंगे और मंदिर का बाना समुद्र में गिर जाएगा तो समझना की दुनिया में महामारी के साथ महायुद्ध होने वाला है। यह घटना घट चुकी है।
अब बाज के ध्वज पर बैठने की घटना से ओडिशा के महान संत अच्युतानंद द्वारा रचित 'भविष्य मालिका' पर शोध करने वाले विद्वान इसे लेकर बेहद चिंतित हैं। इस प्राचीन ग्रंथ के अनुसार, मंदिर के ध्वज पर किसी हिंसक पक्षी का बैठना या ध्वज का खंडित होना किसी बड़े विश्व युद्ध, भीषण प्राकृतिक आपदा या वैश्विक सत्ता परिवर्तन का पूर्व संकेत होता है। लोग डरे हुए हैं क्योंकि अतीत में जब भी मंदिर के ध्वज के साथ कोई असामान्य घटना हुई (जैसे 2020 में ध्वज में आग लगना), उसके तुरंत बाद दुनिया ने कोरोना जैसी तबाही देखी थी।
रहस्यमयी है पुरी का जगन्नाथ मंदिर:
जगन्नाथ मंदिर हमेशा से रहस्यों की भूमि रहा है, जहाँ हवा के विपरीत दिशा में ध्वज का लहराना और गुंबद की छाया न बनना जैसे चमत्कार आज भी विज्ञान को चुनौती देते हैं। ऐसे में, मंदिर की उस आध्यात्मिक ऊर्जा के दायरे को तोड़कर एक पक्षी का वहां बैठना और लंबे समय तक रुके रहना, पारंपरिक नियमों के विरुद्ध माना जा रहा है। यह घटना केवल एक पक्षी का बैठना नहीं है; यह आस्था, आशंका और आने वाले युग परिवर्तन के बीच की एक धुंधली लकीर है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
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