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गोंडा की किरण मिश्रा ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर घर पर आलू के चिप्स और पापड़ बनाने का व्यवसाय शुरू किया. तीन-चार वर्षों में उनका यह काम लाखों रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है और उन्होंने 12 अन्य महिलाओं को रोजगार भी दिया है. उनकी मेहनत ने न केवल उन्हें बल्कि अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है.

गोंडा. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड झंझरी के ग्राम पंचायत पूरे तिवारी की एक महिला, श्री राधे स्वयं सहायता समूह में शामिल होकर आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी हैं. किरण मिश्रा ने समूह से जुड़ने के बाद घर पर ही आलू के चिप्स और पापड़ बनाने का व्यवसाय शुरू किया, जिससे आज उनका सालाना लाखों रुपये का टर्नओवर हो गया है. किरण मिश्रा ने पोस्ट ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की है, पढ़ाई पूरी करने के बाद वह एक हाउसवाइफ के रूप में जीवन बिता रही थीं, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपने सपनों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया. आज उनके साथ 12 अन्य महिलाएं भी इस कार्य में सहयोग कर रही हैं और रोजगार प्राप्त कर रही हैं. किरण मिश्रा बताती हैं कि होली के समय हर घर में चिप्स और पापड़ बनाए और खाए जाते हैं. इसी से प्रेरित होकर उन्होंने इस व्यवसाय की शुरुआत की, इस व्यवसाय ने उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया और अब वह हर महीने अच्छी आय अर्जित कर रही हैं.

कितनी महिलाओं को दे रहे हैं रोजगार

इस व्यवसाय के माध्यम से किरण मिश्रा ने 12 महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है. यह सभी महिलाएं मिलकर चिप्स और पापड़ बनाने का कार्य करती हैं, जिससे उन्हें भी आर्थिक लाभ हो रहा है. किरण मिश्रा बताती है कि आलू के पापड़ तैयार करने के लिए पहले उच्च गुणवत्ता वाले आलू का चयन किया जाता है. उन्हें उबालकर कद्दूकस किया जाता है और फिर उसमें सेंधा नमक, कसूरी मेथी, लाल मिर्च और अन्य मसाले मिलाए जाते हैं. चिप्स तैयार करने के लिए पहले चिप्स कटर से आलू को काटा जाता है उसके बाद उसको उबला जाता है. फिर धूप में सुखाया जाता है और चिप्स तैयार हो जाता है. इस बार किरण मिश्रा ने 25 से 30 कुंतल आलू और 1 से 2 कुंतल सूजी के पापड़ तैयार किए हैं. उन्होंने बताया कि हमारे यहां जो आलू के चिप्स तैयार किए जाते हैं उनको व्रत में भी खाया जा सकता है क्योंकि हम आलू के चिप्स में सेंधा नमक का प्रयोग करते है.

कब से कर रहे हैं चिप्स पापड़ का काम

किरण मिश्रा बताते हैं कि लगभग तीन से चार साल हो गए हैं हमको चिप्स पापड़ का काम करते हुए. उन्होंने बताया कि इस बार हमारे यहां लगभग 25 से 30 कुंतल आलू के चिप्स और पापड़ बनाए गए हैं. किरण मिश्रा बताती हैं कि चिप्स और पापड़ तैयार करने में लगभग 20,000 से 30,000 रुपये की लागत आती है. उनका टर्नओवर 90 हजार से 1 लाख रुपये तक पहुंच चुका है. इस तरह, उनका व्यवसाय न केवल उन्हें बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना रहा है. किरण मिश्रा बताती हैं कि उनके चिप्स और पापड़ की सप्लाई गोंडा जिले की कई निजी दुकानों और मॉल में हो रही है. इसके अलावा, वे अपने घर से भी इसकी आपूर्ति कर रही हैं.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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