बॉलीवुड और होली का रिश्ता दशकों पुराना है, जहां फिल्मों ने इस त्योहार को जीने का एक नया अंदाज दिया है. ‘रंग बरसे’ और ‘होली के दिन’ जैसे सदाबहार क्लासिक्स जहां परंपरा और भावनाओं का मेल दिखाते हैं, वहीं ‘बलम पिचकारी’ और ‘बद्री की दुल्हनिया’ जैसे गाने नई पीढ़ी की मस्ती और मॉडर्निटी को पेश करते हैं. ‘बागबान’ का ‘रघुवीरा’ पारिवारिक जुड़ाव को दर्शाता है, तो ‘गो पागल’ उत्तर भारत की बेपरवाह ऊर्जा को. कुल मिलाकर, बॉलीवुड के ये मशहूर गीत प्यार, विद्रोह और बेपनाह खुशी के रंगों के साथ हमारी होली के जश्न को मुकम्मल बनाते हैं.
नई दिल्ली: बॉलीवुड और होली का रिश्ता उतना ही गहरा है जितना कि रंगों और गुलाल का. फिल्मों ने हमारे त्योहारों को न सिर्फ गाने दिए हैं, बल्कि जश्न मनाने का तरीका भी बदल दिया है. शोले (होली के दिन): यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा का इतिहास है. रामगढ़ की मस्ती, बसंती का बेपरवाह डांस और वीरू की छेड़खानी इस गाने को सदाबहार बनाती है. लेकिन इस जश्न के पीछे गब्बर सिंह की वो खौफनाक मौजूदगी ‘कब है होली?’ वाला तनाव भी पैदा करती है, जो इसे यादगार बना देता है.
सिलसिला (रंग बरसे): अगर इस गाने के बिना होली मनाई जाए, तो वो अधूरी मानी जाएगी. अमिताभ बच्चन की जादुई आवाज और रेखा के साथ उनकी केमिस्ट्री ने इसे ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ बना दिया है. यश चोपड़ा ने जिस खूबसूरती से इस गाने में त्योहार के बीच पनपते किरदारों के तनाव और चाहत को दिखाया है, वो लाजवाब है.
ये जवानी है दीवानी (बलम पिचकारी): नई पीढ़ी के लिए यह गाना होली का नेशनल एंथम बन चुका है. रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की मस्ती, दोस्तों का साथ और वो मॉडर्न वाइब हमें बताती है कि होली सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि खुल कर जीने का बहाना भी है.
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मोहब्बतें (सोनी सोनी): इस गाने में होली का इस्तेमाल ‘बदलाव’ के प्रतीक के रूप में किया गया है. जब गुरुकुल के सख्त अनुशासन के बीच युवा छात्र रंग उड़ाते हैं, तो वह सिर्फ त्योहार नहीं बल्कि पुरानी रूढ़ियों के खिलाफ एक खूबसूरत विद्रोह जैसा लगता है.
बागबान (होली खेले रघुवीरा): यह गाना हमें याद दिलाता है कि होली सिर्फ युवाओं के लिए नहीं है. अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की ग्रेसफुल परफॉर्मेंस और पारंपरिक लोक संगीत का तड़का इस गाने को पारिवारिक समारोहों की पहली पसंद बनाता है.
बद्रीनाथ की दुल्हनिया (बद्री की दुल्हनिया): वरुण धवन और आलिया भट्ट का यह टाइटल ट्रैक आज के दौर की ‘देसी और कूल’ होली को दिखाता है. तेज बीट्स और जबरदस्त डांस स्टेप्स के साथ यह गाना किसी भी पार्टी में जान फूंकने के लिए काफी है.
जॉली एलएलबी 2 (गो पागल): उत्तर भारत, खासकर यूपी की गलियों वाली असली होली देखनी हो, तो यह गाना एकदम फिट है. इसमें वो बेपरवाह और थोड़ी ‘जंगली’ मस्ती है जो आपको सड़क पर उतरकर नाचने को मजबूर कर देती है. यह गाना त्योहार की असली रॉ एनर्जी को दिखाता है.
एक्शन रिप्ले (छान के मोहल्ला/छुरा के ले गयो): यह गाना हमें 70 के दशक की रेट्रो दुनिया में ले जाता है. चमकीले कपड़े, बड़े चश्मे और पुराने जमाने के डांस स्टेप्स के साथ यह हिंदी सिनेमा के ‘गोल्डन एरा’ को एक रंगीन और मजाकिया श्रद्धांजलि देता है.
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