WION की रिपोर्ट के अनुसार INS विक्रांत अरब सागर में तैनात है. INS विक्रांत सतर्क, तैयार और रणनीतिक रूप से सक्रिय है. 262 मीटर लंबा यह युद्धपोत सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि समुद्री शक्ति का चलता-फिरता किला है. MiG-29K लड़ाकू विमान, एडवांस रडार सिस्टम और मल्टी-लेयर डिफेंस के साथ यह समुद्री निगरानी और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की भूमिका में है.
- इधर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब यूरोप तक दिखाई देने लगा है. यूनाइटेड किंगडम ने घोषणा की है कि वह पूर्वी भूमध्यसागर में अपना युद्धपोत HMS ड्रेगन तैनात कर रहा है. इसके साथ दो बहुउद्देश्यीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी भेजे जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य साइप्रस की हवाई सुरक्षा, विशेषकर ड्रोन हमलों से बचाव, को मजबूत करना है. ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित खतरों को ध्यान में रखकर उठाया गया है.
- इधर फ्रांस ने भी अपनी सैन्य सक्रियता बढ़ा दी है. फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने परमाणु शक्ति से संचालित विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल को बाल्टिक सागर से भूमध्यसागर की ओर रवाना करने का आदेश दिया है. यह विमानवाहक पोत अपने लड़ाकू विमानों और सुरक्षा प्रदान करने वाले युद्धपोतों के साथ आगे बढ़ेगा. यूरोपीय देशों की यह सक्रियता संकेत देती है कि संघर्ष का प्रभाव अब केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सामरिक संतुलन को भी प्रभावित कर रहा है.
अरब सागर में INS विक्रांत की तैनाती
- रिपोर्ट्स बताती हैं कि शुरुआती हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकाने निशाने पर आए. कुछ युद्धपोत डुबोए गए. मिसाइल लॉन्च साइट्स तबाह की गईं. लेकिन ईरान ने होर्मुज बंद किया तो वैश्विक तेल आपूर्ति रुक सकती है. इससे कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं और विश्व अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लग सकता है.
- ईरान को इस संघर्ष में भारी नुकसान की खबरें हैं. सैकड़ों लोगों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है. परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा है. बैलिस्टिक मिसाइल स्टॉक का बड़ा हिस्सा नष्ट होने की बात कही जा रही है. तेल निर्यात में गिरावट आई है. कई सैन्य कमांडरों के मारे जाने की रिपोर्ट्स भी सामने आई हैं. हालांकि आधिकारिक पुष्टियां सीमित हैं, लेकिन आर्थिक और सैन्य दबाव साफ दिखाई दे रहा है.
INS विक्रांत अरब सागर में रणनीतिक तैनाती पर है. (फाइल फोटो PTI)
INS विक्रांत इस समय कहां तैनात है और उसकी भूमिका क्या है?
INS विक्रांत अरब सागर में रणनीतिक तैनाती पर है. इसका प्राथमिक उद्देश्य समुद्री निगरानी, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय समुद्री गतिविधियों पर नजर रखना है. इसके डेक पर तैनात लड़ाकू विमान लंबी दूरी तक ऑपरेशन कर सकते हैं. एडवांस रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम इसे समुद्री सुरक्षा कवच बनाते हैं.
अमेरिका ने ईरान की नेवी को कितना नुकसान पहुंचाया?
अमेरिका के ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू होने के 100 घंटों के भीतर ईरानी सैन्य शक्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया है. अमेरिकी नौसेना के एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, ईरान की पूरी नौसेना को समुद्र में डुबोने का अभियान सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है.उन्होंने बताया, पिछले 100 घंटों में अमेरिका ने 2,000 से अधिक घातक हथियारों से 2,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमला किया है.
ईरान को अब तक कितना नुकसान हुआ है?
रिपोर्ट्स के अनुसार कई सैन्य ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए हैं. परमाणु सुविधाओं के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है. मिसाइल भंडार का हिस्सा नष्ट हुआ है. तेल निर्यात में गिरावट आई है. नागरिक और सैन्य हताहतों की संख्या सैकड़ों में बताई जा रही है. हालांकि सटीक आंकड़े अभी स्पष्ट नहीं हैं.
क्या यह संघर्ष लंबा चल सकता है?
एक्सर्पट का मानना है कि स्थिति बेहद संवेदनशील है. यदि होर्मुज सुरक्षित रहता है तो तनाव नियंत्रित रह सकता है. लेकिन किसी भी बड़े जवाबी हमले से संघर्ष फैल सकता है. क्षेत्रीय स्थिरता फिलहाल अनिश्चितता के दौर में है.
ईरान कई सैन्य ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए हैं. (फोटो AP)
समुद्र में रणनीतिक संतुलन
अरब सागर में INS विक्रांत की मौजूदगी समुद्री शक्ति संतुलन का संकेत है. 45000 टन वजनी यह स्वदेशी कैरियर 30 से अधिक एयरक्राफ्ट ऑपरेट कर सकता है. एडवांस सेंसर, मल्टी-लेयर डिफेंस और लंबी ऑपरेशनल रेंज इसे क्षेत्र में प्रभावी बनाते हैं. मिडिल ईस्ट में उठती आग के बीच समुद्र में यह एक शांत लेकिन शक्तिशाली उपस्थिति है रणनीतिक, सतर्क और निर्णायक.
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