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राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पार्क की दो पानी की टंकियां झांसी के लिए भरोसे की निशानी बन चुकी हैं. ये ऊंचाई पर बनी टंकियां शहर के पुराने और नए मोहल्लों तक पानी पहुंचाती हैं, घरों में रसोई चलाती हैं, बच्चों को साफ पानी देती हैं और कारोबार को सुचारू बनाए रखती हैं. गर्मियों में भी ये टंकियां शहर की प्यास बुझाती हैं और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान बनाती हैं.

पानी की टंकी

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के नाम पर बने मैथिलीशरण गुप्त पार्क आश्रम परिसर में दो बड़े पानी की टंकियां शहर की आबादी के लिए किसी भी देवदूत से कम नहीं हैं. शहर की करोड़ों की आबादी तक रोज़ पानी सुबह होते ही इन टंकियों से सप्लाई शुरू होती है.

पानी की टंकी

 ये दोनों टंकियां पार्क के पास ऊंचाई पर बनी हैं ताकि पानी दबाव के साथ दूर तक पहुंच सके शहर के कई पुराने और नए इलाकों को इनसे जोड़ा गया है. नगर निगम की टीम रोज इनकी निगरानी करती है पानी की मोटर चलती है. टंकी भरती है फिर तय समय पर सप्लाई दी जाती है.

पानी की टंकी

गर्मी के दिनों में जब पानी की मांग बढ़ जाती है. तब भी यही टंकियां राहत देती हैं, लोग कहते हैं कि अगर ये टंकियां न हो तो शहर में पानी का संकट खड़ा हो सकता है.

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पानी की टंकी

 स्थानीय लोगों का कहना है कि कई साल से ये टंकियां उनकी प्यास बुझा रही हैं. बुजुर्ग बताते हैं कि पहले पानी के लिए दूर जाना पड़ता था. अब घर तक पानी आता है, महिलाएं कहती हैं कि समय की बचत होती है. बच्चों को साफ पानी मिलता है, दुकानदार कहते हैं कि कारोबार चलाने में सहूलियत मिलती है. लोगों का मानना है कि इन टंकियों ने शहर की जिंदगी बदल दी है. कई लोग इन्हें शहर की जीवन रेखा मानते हैं.

पानी की टंकी

आज भी हर दिन हजारों लीटर पानी इन टंकियों में भरता है फिर वही पानी पाइप के रास्ते घर घर पहुंचता है. साफ पानी से सेहत बेहतर रहती है. बीमारी का खतरा कम होता है, लोगों को राहत मिलती है शहर बढ़ रहा है आबादी बढ़ रही है, पर इन टंकियों का महत्व भी बढ़ता जा रहा है.

पानी की टंकी

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पार्क की ये दो पानी की टंकियां झांसी के लोगों के लिए भरोसे का नाम बन चुकी हैं. ये चुपचाप खड़ी हैं पर हर दिन लाखों लोगों की प्यास बुझा रही हैं.

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