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इराजरायल ने एक झटके में ईरान की कमर तोड़ दी. चंद घंटों के भीतर उसके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडरों को मार डाला. इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ऐलान कर द‍िया है क‍ि आतंकी शासन पर हमले होते रहेंगे और हजारों हमले होंगे. नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा है कि ‘आतंकी शासनों’ पर हमले रुकेंगे नहीं बल्कि आने वाले दिनों में हजारों नए हमले किए जाएंगे. सामरिक मामलों के विशेषज्ञ इसे एक बहुत बड़े ग्लोबल मैसेज के तौर पर देख रहे हैं. तो क्या इजरायल अब उन सभी देशों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है जो आतंकवाद की फैक्ट्री चलाते हैं? क्या इजरायल का अगला बड़ा टारगेट पाकिस्तान के परमाणु हथियार हो सकते हैं?

अक्‍सर पाकिस्‍तान के एनलिस्‍ट की बातों में यह डर भी साफ झलकता नजर आया है कि ईरान से खामनेई के शासन का सफाया करने के बाद इजरायल का अगला निशाना पाकिस्‍तान होगा. ईरान में प्रो-अमेरिकी सरकार बनने के बाद इजरायल की खुफिया एजेंसी मौसाद को ईरान बॉर्डर के जरिए पाकिस्‍तान के पहले से अशांत पश्चिमी बॉर्डर पर सीधा एक्‍सेस मिल जाएगा.

एक्स पर एक वीडियो संदेश में बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के लोगों को सीधे संबोधित किया. उन्होंने न केवल सैन्य कार्रवाई तेज करने की बात कही बल्कि ईरानी जनता से विद्रोह करने की अपील भी की. नेतन्याहू के कहा, “हम आने वाले दिनों में इस आतंकवादी शासन के हजारों ठिकानों पर हमले करेंगे.” उन्होंने ईरान के नागरिकों से कहा कि यह उनके लिए “पीढ़ियों में एक बार मिलने वाला अवसर” नेतन्याहू ने फारसी, कुर्द, अज़ेरी, अहवाज़ी और बलूच समुदायों को एकजुट होने और अपने जीवन को नर्क बनाने वाले शासकों को उखाड़ फेंकने के लिए लाखों की संख्या में सड़कों पर उतरने का आह्वान किया. यह बयान उस वक्त आया है जब शनिवार को इजरायल ने लगभग 200 फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करते हुए ईरान के 500 से अधिक ठिकानों (जिनमें मिसाइल लॉन्चर और सैन्य मुख्यालय शामिल हैं) पर भारी बमबारी की है.

पहलगाम का पाप: क्या पाकिस्तान तक पहुंचा नेतन्याहू का मैसेज?

इजरायल की इस आक्रामकता को सिर्फ ईरान तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता. इजरायल पिछले कई महीनों से लगातार यह वैश्विक संदेश दे रहा है कि आतंकियों को पालने वाले अब बचेंगे नहीं. हाल ही में भारत के जम्मू-कश्मीर स्थित पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने एक बड़ा हमला किया था जिसमें निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों को निशाना बनाया गया. पाकिस्तान दशकों से भारत के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर  चला रहा है और दुनिया के कई खूंखार आतंकी संगठनों (जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद) का पनाहगार है.

नेतन्याहू के आतंकी शासन शब्द का इस्तेमाल केवल ईरान के संदर्भ में नहीं बल्कि एक सिद्धांत के रूप में देखा जा रहा है. कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि जब नेतन्याहू कहते हैं कि हजारों हमले होंगे तो यह उन सभी देशों के लिए एक रेड अलर्ट है जो आतंकवाद को स्‍टेट पॉलिसी के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इजरायल की मोसाद और सैन्य मशीनरी यह दिखा चुकी है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी देश की संप्रभुता की परवाह किए बिना उसकी जमीन पर घुसकर आतंकियों का खात्मा कर सकते हैं.

क्या इजरायल का अगला निशाना पाकिस्तान होगा?

इस पूरे घटनाक्रम में एक और बेहद संवेदनशील और खतरनाक एंगल जुड़ता है, वह है पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम. कई अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों और थिंक टैंक ने समय-समय पर यह चेतावनी दी है कि इजरायल की हिट-लिस्ट में पाकिस्तान का नंबर भी आ सकता है. इसके पीछे के तर्क बेहद ठोस हैं:

1. इस्लामिक बम का डर: इजरायल की सबसे बड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता किसी मुस्लिम देश के पास परमाणु बम का होना है. इजरायल ने 1981 में इराक के ओसिराक (Osirak) परमाणु रिएक्टर और 2007 में सीरिया के अल-किबर (Al-Kibar) रिएक्टर को हवाई हमले करके तबाह कर दिया था ताकि वे परमाणु बम न बना सकें. पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र घोषित मुस्लिम परमाणु हथियार संपन्न देश है.

2. आतंकियों के हाथ परमाणु हथियार लगने का खौफ: इजरायल (और यहां तक कि अमेरिका भी) इस बात से खौफज़दा रहता है कि राजनीतिक रूप से बेहद अस्थिर पाकिस्तान में अगर कभी सत्ता पर चरमपंथियों का कब्ज़ा हो गया तो ये परमाणु हथियार आतंकवादियों (जैसे हमास, हिज़्बुल्लाह या अल-कायदा) के हाथ लग सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो इजरायल का वजूद सीधे तौर पर खतरे में आ जाएगा.

3. पाकिस्तान की ईरान और गाज़ा पर बयानबाजी: पाकिस्तान हमेशा से फिलिस्तीन का मुखर समर्थक रहा है और इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता. हाल के संघर्षों में पाकिस्तान के कई नेताओं ने इजरायल को सबक सिखाने और अपने इस्लामिक बम के इस्तेमाल की गीदड़भभकियां दी हैं. इजरायल ऐसी धमकियों को कभी हल्के में नहीं लेता.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व का युद्ध और फैलता है और पाकिस्तान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान या उसके प्रॉक्सी गुटों का समर्थन करता है तो इज़रायल पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को न्यूट्रलाइज़ करने के लिए प्रिवेंटिव स्ट्राइक करने में जरा भी नहीं हिचकिचाएगा. इजरायल की वायुसेना (IAF) पहले ही ईरान पर हमला करके अपनी लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक क्षमता का प्रदर्शन कर चुकी है.

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