29 सितंबर 2025 को लोकसभा में विशेष चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “9 मई को पाकिस्तान ने भारत पर करीब 1,000 मिसाइलों और ड्रोन्स से बड़े हमले की कोशिश की. अगर ये किसी भारतीय शहर पर गिरते तो भारी तबाही मच जाती. लेकिन हमारी वायु रक्षा प्रणालियों ने सभी 1,000 मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट कर दिया.” उन्होंने इसे भारतीय सेना की ऐतिहासिक सफलता बताया और कहा कि पूरा देश इस पर गर्व करता है. विपक्ष पर तंज कसते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार की असफलता की उम्मीद में बैठी थी, लेकिन भारत ने इसे पूरी तरह विफल कर दिया.
कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई को हुई, जब भारत ने पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए. ये हमले जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के मुख्यालयों पर केंद्रित थे, जिसमें कोई सैन्य या नागरिक लक्ष्य नहीं था. भारत ने इसे सटीक, मापी हुई और गैर-उकसावे वाली कार्रवाई बताया. लेकिन पाकिस्तान ने जवाबी हमला किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया. इसके बाद भारत ने 11 पाकिस्तानी एयरबेस पर हमले किए, लेकिन दोनों तरफ से नागरिक क्षेत्रों को टारगेट नहीं किया गया और कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ.
पीएम मोदी ने पाकिस्तान की झूठी प्रोपेगैंडा का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने आदमपुर एयरबेस पर हमले का दावा किया था. मोदी ने कहा कि मैं अगले दिन ही आदमपुर गया और उनके झूठ को बेनकाब कर दिया. तब उन्हें पता चला कि यह झूठ नहीं चलेगा. ऑपरेशन की सफलता की मुख्य वजह भारत की मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम थी, जिसमें S-400, अकाश, बाराक-8 जैसी उन्नत प्रणालियां शामिल थीं. इन सिस्टम्स ने पाकिस्तानी ड्रोन्स और मिसाइलों को पूरी तरह नाकाम किया, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ. ऑपरेशन सिंदूर की खासियत इसकी सटीकता, अनुशासन और संयम थी.
भारत ने दिखाया संयम
भारत ने पाकिस्तान को ज्यादा नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हुए भी केवल जरूरी लक्ष्यों पर फोकस किया, ताकि लोगों को नुकसान न हो. मोदी ने कहा कि इरादा कभी लोगों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि आतंकी नेटवर्क को नष्ट करना था. 10 मई को डीजीएमओ स्तर पर समझौते के बाद सीजफायर हुआ, जो अब तक कायम है. सरकार और सेना ने बार-बार कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर केवल पॉज है और कोई नई उकसावा पर ऑपरेशन सिंदूर 2.0 होगा, जो कहीं ज्यादा कठोर होगा.
वर्तमान ईरान संकट में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और ‘रोरिंग लायन’ के तहत हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या हुई और नागरिक हताहत हुए. ईरान ने भी जवाबी हमले किए. इसके विपरीत, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने संयम बरता, कोई राजनीतिक नेतृत्व को निशाना नहीं बनाया और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की नॉन-कॉन्टैक्ट वारफेयर और परमाणु सीमा के नीचे लड़ाई की क्षमता का प्रमाण है. ईरान संकट के बीच ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य परिपक्वता और रणनीतिक संयम का उदाहरण बनकर उभरा है.
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