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दिल्ली-एनसीआर में 1 अप्रैल 2030 के बाद केवल इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री अनिवार्य करने के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के प्रस्ताव का घरेलू ऑटोमोबाइल उद्योग ने कड़ा विरोध किया है। उद्योग संगठनों का कहना है कि इतने बड़े नीति बदलाव से पहले एक ठोस और ताजा वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वाहनों का प्रदूषण में वास्तविक योगदान कितना है।

बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों की आपत्ति क्या रही?

बैठक में शामिल कई सूत्रों के अनुसार, CAQM (सीएक्यूएम) की विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष और आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अशोक झुनझुनवाला ने यह रुख अपनाया कि प्रस्ताव पर आगे बढ़ने के लिए किसी वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ ऑटो उद्योग अधिकारी ने बताया कि बैठक में मौजूद उद्योग नेताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, वाहनों के प्रदूषण में योगदान का वैज्ञानिक आकलन कराने की सर्वसम्मत मांग को नजरअंदाज कर दिया गया।

 

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