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जैसा कि ज्योतिषियों ने आशंक जताई थी कि मंगल के कुंभ में जाने से राहु के साथ जब उसकी युति बनेगी तो 'अंगारक योग' का निर्माण होगा जो आग और विस्फोट को जन्म देता है। इसी के साथ ही सूर्य और चंद्र ग्रहण के बीच कम अंतराल होने के कारण फिर से देश और युनिया में बड़े युद्धका आगाज होगा। हम देख रहे हैं कि इसी बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान का युद्ध शुरू हो गया और दूसरी ओर इजराइल ने ईरान पर हमला कर दिया है। अब आगे क्या होगा?

 

महायुद्ध की आहट और भारत की शक्ति:

मंगल का मकर राशि में प्रवेश और शनि की वक्री चाल ने 'महादंगल' का निर्माण किया लेकिन मंगल ने जब कुंभ में प्रवेश करके जब 'अंगारक योग' का निर्माण किया तो यह तय हो गया था कि अब युद्ध होना है। लेकिन यह तो अभी मात्र शुरुआत है। ज्योतिषियों का अनुमान है कि 2026 में भारत एक बड़े युद्ध का हिस्सा बन सकता है, जो 2027 के अंत तक चल सकता है। हालांकि, मंगल के गोचर के कारण भारत की सैन्य शक्ति थल, नभ और जल तीनों मोर्चों पर अजेय रहेगी। शत्रुओं की तमाम साजिशों के बावजूद भारत की वैश्विक शक्ति और प्रतिष्ठा में वृद्धि निश्चित है।


 


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19 मार्च के बाद बदल जाएगा देश और दुनिया का संपूर्ण परिदृश्य:

<strong>रौद्र संवत्सर: </strong>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वर्तमान में चल रहा &#039;सिद्धार्थ संवत्सर&#039; केवल एक बड़ी त्रासदी की भूमिका तैयार कर रहा है। असली चुनौती 19 मार्च 2026 से शुरू होगी, जब &#039;रौद्र नामक संवत्सर&#039; का उदय होगा। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह समय अपने साथ भीषण विनाश और नरसंहार लेकर आ सकता है। मध्य एशिया में जारी हिंसा की लपटें दक्षिण एशिया तक पहुंचने की आशंका है, जिससे पूरी दुनिया में भय का वातावरण बनेगा।


 

ग्रहों की चाल और कूटनीतिक भूचाल: 

मिथुन में गुरु अतिचारी गोचर कर रहे हैं जो कि विश्‍व के लिए सबसे खराब स्थिति है। वर्ष 2026 में बृहस्पति (गुरु) का गोचर सबसे अधिक निर्णायक होने वाला है। जून 2026 तक गुरु के मिथुन राशि में रहने से मीडिया जगत में भ्रम और फर्जी खबरों का बोलबाला रहेगा, लोगों की बुद्धि पर ताला लग जाएगा, जिससे देशों के बीच कूटनीतिक दूरियां बढ़ेंगी और युद्ध होंगे। जून के बाद जब गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करेंगे, तो दुनिया में कट्टर राष्ट्रवाद की लहर दौड़ेगी। विशेषकर 2 जून की मध्यरात्रि के ग्रह योग भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को अपने चरम पर ले जा सकते हैं, हालांकि भारत इस परिस्थिति को संभालने में सक्षम रहेगा। जुलाई और अगस्त 2026 के बीच जब सूर्य, चंद्रमा और गुरु एक साथ कर्क राशि में आएंगे, तो &#039;पुष्य नक्षत्र&#039; के प्रभाव से जल प्रलय और भीषण आगजनी जैसी घटनाएं दुनिया को हिलाकर रख देंगी। बड़े भूकंप और ज्वालामुखी फटने की घटनाएं पृथ्वी के भूगोल को बदलने की चेतावनी दे रही हैं।


 

विध्वंस से सृजन की ओर:

शनि का न्याय 2020 से शुरू हुआ वैश्विक बदलाव का यह सिलसिला 2026 में अपने सबसे कठिन दौर में पहुँचेगा। शनि का मीन राशि में होना पुराने ढांचों को गिराने का काम करेगा। जब शनि मेष में गोचर करेगा तब संपूर्ण विश्‍व के देश एक दूसरे से लड़ रहे होंगे। यह कालखंड विनाशकारी भले ही लगे, लेकिन यह एक नई व्यवस्था के सृजन की नींव भी बनेगा। 2028-29 तक शनि की यह गति दुनिया को एक बिल्कुल नए सांचे में ढाल देगी, जहाँ पुराने गठबंधनों का अंत होगा और नई वैश्विक शक्तियों का उदय होगा।

 

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