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3 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाना आसान नहीं, लेकिन नामुमकिन भी नहीं है. फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि आप निवेश कब शुरू करते हैं. 30 की उम्र में शुरुआत और 40 की उम्र में शुरुआत के नतीजे बिल्कुल अलग हो सकते हैं. समय की छोटी देरी भी आपके लक्ष्य को लाखों–करोड़ों दूर कर सकती है.
40 की उम्र में शुरू किया निवेश तो 3 करोड़ का सपना रह सकता है अधूरा, चौंकाने वाले आंकड़े. (Image:AI)
नई दिल्ली. रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड बनाना एक दिन का काम नहीं, बल्कि लंबी योजना का नतीजा होता है. निवेश की शुरुआत में देरी आपके लक्ष्य को महंगा बना सकती है. कंपाउंडिंग का फायदा तभी मिलता है जब पैसा लंबे समय तक निवेशित रहे. जानिए क्यों 40 की उम्र में शुरुआत करना 3 करोड़ के लक्ष्य के लिए चुनौती बन सकता है.
समय की देरी क्यों पड़ती है भारी?
निवेश की दुनिया में समय सबसे अहम भूमिका निभाता है. जब आप जल्दी शुरुआत करते हैं तो आपका पैसा ज्यादा सालों तक बाजार में काम करता है. हर साल मिलने वाला रिटर्न दोबारा निवेश होता है और उसी पर फिर रिटर्न मिलता है. यही कंपाउंडिंग की ताकत है. अगर आप 10 साल देर कर देते हैं तो सिर्फ 10 साल का रिटर्न ही नहीं खोते, बल्कि उस पर मिलने वाले आगे के रिटर्न से भी वंचित रह जाते हैं. रिटायरमेंट प्लानिंग में यह असर तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन लंबे समय में इसका फर्क करोड़ों में पहुंच सकता है.
30 की उम्र में SIP शुरू करने का गणित
मान लीजिए कोई व्यक्ति 30 साल की उम्र में हर महीने 9,000 रुपये की SIP शुरू करता है. अगर यह निवेश 30 साल तक जारी रहे और औसतन 12 फीसदी सालाना रिटर्न मिले, तो कुल निवेश करीब 32.40 लाख रुपये होगा. इस पर मिलने वाला संभावित रिटर्न लगभग 2.85 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. यानी रिटायरमेंट तक कुल फंड करीब 3.17 करोड़ रुपये बन सकता है. यह उदाहरण दिखाता है कि नियमित और अनुशासित निवेश कैसे बड़े लक्ष्य को आसान बना सकता है.
40 की उम्र में शुरुआत का असर
अब वही व्यक्ति अगर 40 साल की उम्र में 9,000 रुपये की SIP शुरू करे और सिर्फ 20 साल निवेश करे, तो तस्वीर बदल जाती है. इस दौरान कुल निवेश करीब 21.60 लाख रुपये होगा और संभावित रिटर्न लगभग 68 लाख रुपये के आसपास रह सकता है. यानी कुल फंड करीब 90 लाख रुपये ही बन पाएगा. 3 करोड़ तक पहुंचने के लिए उसे हर महीने लगभग 30,000 रुपये या उससे अधिक निवेश करना पड़ सकता है. साफ है कि देर से शुरुआत करने पर मासिक निवेश का बोझ कई गुना बढ़ जाता है.
लंबी अवधि में म्यूचुअल फंड की भूमिका
लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए म्यूचुअल फंड को अक्सर बेहतर विकल्प माना जाता है क्योंकि ये बाजार से जुड़े रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं. SIP के जरिए निवेशक छोटी-छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं और जोखिम को समय के साथ संतुलित कर सकते हैं. हालांकि बाजार जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं है और रिटर्न की गारंटी नहीं होती. इसलिए निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना समझदारी भरा कदम हो सकता है. सही योजना, समय पर शुरुआत और अनुशासन ही 3 करोड़ जैसे बड़े लक्ष्य को हकीकत में बदल सकते हैं.
About the Author
Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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