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होमवीडियोentertainment‘बेचारा दिल क्या करे’, आशा भोसले की आवाज में बसा गुलजार के अल्फाजों का जादू

 

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‘बेचारा दिल क्या करे’… ये गीत सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि उन नाजुक एहसासों की दास्तान है जो हर आशिक के दिल में बसते हैं. 1975 में आई फिल्म ‘खुशबू’ का यह गीत जब भी बजता है, समय ठहर सा जाता है. फरीदा जलाल और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया यह सखी गीत प्यार की मासूम शिकायत को बखूबी दर्शाता है.आशा भोसले की उस दमकती आवाज ने इस गीत को ऐसी रूह दी कि हर दर्दमंद दिल इससे जुड़ महसूस करता है. गुलजार के बोल जैसे मखमल पर उकेरे गए हों, हर शब्द में मोहब्बत और बेचैनी की महक है. आर.डी. बर्मन के संगीत ने इस गीत में जो सादगी और गहराई भरी है, वह सीधे दिल को छू जाती है. यह गीत आज भी उतना ही ताजा है जितना पांच दशक पहले था. हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग की यह अमर निशानी साबित करती है कि सच्चा संगीत कभी पुराना नहीं होता. यह गीत क्लासिक बॉलीवुड संगीत का प्रतीक बना हुआ है, जो प्यार की नाजुक भावनाओं को छूता है. सुनते ही मन में एक मीठी उदासी और लंबी चाहत जाग उठती है.

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