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उत्तर प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शुमार बरेली कॉलेज एक बार फिर सुर्खियों में है. 1837 में स्थापित यह ऐतिहासिक कॉलेज न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम में भी इसकी अहम भूमिका रही है. अब लंबे समय से इसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की मांग तेज हो गई है, जिससे बरेली मंडल के हजारों छात्रों के भविष्य को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.

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बरेली. बरेली कॉलेज उत्तर प्रदेश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है. इसकी स्थापना 1837 में एक छोटे सरकारी स्कूल के रूप में हुई थी. साल 1850 में इसे कॉलेज का दर्जा मिला. 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कॉलेज को भारी नुकसान पहुंचा और उस समय के ब्रिटिश प्रिंसिपल की हत्या कर दी गई थी. बाद में 1884 में पंडित छेदालाल और अन्य स्थानीय रईसों के प्रयासों से इसे दोबारा शुरू किया गया. वर्तमान मुख्य भवन ‘लाल भवन’ का शिलान्यास 17 जुलाई 1905 को हुआ और 1906 में इसका विधिवत उद्घाटन किया गया.

स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, आजादी की लड़ाई में बरेली कॉलेज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. कई स्वतंत्रता सेनानियों ने यहां से शिक्षा ग्रहण करते हुए देश की आजादी के आंदोलन में भाग लिया. इस ऐतिहासिक विरासत के कारण बरेली कॉलेज को जिले की शान माना जाता है.

39 विभाग, 18 हजार छात्र और मजबूत फैकल्टी
कॉलेज के प्राचार्य ओम प्रकाश राय के अनुसार, वर्तमान में संस्थान में 39 विभाग संचालित हो रहे हैं. करीब 18,000 छात्र-छात्राएं यहां शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. कॉलेज में समृद्ध फैकल्टी, बेहतर रिसर्च डेवलपमेंट और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं. बरेली मंडल के मिडिल, अपर और लोअर क्लास के छात्र यहां एक साथ शिक्षा ग्रहण करते हैं. कॉलेज के पास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मानकों के अनुरूप पर्याप्त भूमि और आधारभूत संरचना भी मौजूद है.

सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने की मांग क्यों तेज?
हाल के वर्षों में बरेली कॉलेज को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की मांग जोर पकड़ रही है. दिल्ली और लखनऊ के बीच कोई भी केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं है, ऐसे में बरेली को यह दर्जा मिलने से पूरे मंडल के हजारों छात्रों को लाभ मिल सकता है. स्थानीय प्रबंधन, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव उत्तर प्रदेश शासन को भेजे गए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर भी इस मांग को लेकर संवाद हुआ है.

विधानसभा में भी उठी आवाज
स्थानीय विधायक संजीव अग्रवाल ने विधानसभा में बरेली कॉलेज को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव रखा है. प्रश्नकाल के दौरान भी उन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया. यदि कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलता है, तो बरेली मंडल के हजारों-लाखों छात्रों के भविष्य को नई दिशा मिल सकती है.

बरेली की शान, भविष्य की उम्मीद
अंग्रेजों के दौर से लेकर आजादी की लड़ाई और वर्तमान शैक्षणिक विकास तक, बरेली कॉलेज ने हर दौर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है. अब सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने की उम्मीद के साथ यह ऐतिहासिक संस्थान एक नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है.

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Madhuri Chaudhary

पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें

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