दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (डीकेवीआईबी) ने दिल्ली खादी कौशल विकास योजना को लागू करने का प्रस्ताव पास कर दिया है। योजना के तहत 16 हजार से अधिक कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और डिजिटल बाजार से जोड़ने की सुविधा दी जाएगी।
डीकेवीआईबी की 55वीं बोर्ड बैठक उद्योग मंत्री और बोर्ड के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में दिल्ली खादी कौशल विकास योजना को औपचारिक मंजूरी दी गई। इस योजना को पहले ही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई वाली कैबिनेट से स्वीकृति मिल चुकी है। मंत्री ने कहा कि ये योजना कारीगरों को सम्मान, स्थायी आय और लंबे समय की आर्थिक सुरक्षा देगी।
योजना वित्तीय वर्ष 2025–26 और 2026–27 में लागू होगी। इसका लाभ उन लोगों को मिलेगा जो कम से कम पांच साल से दिल्ली के निवासी हैं। योजना के तहत 16,000 से ज्यादा लाभार्थियों को अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें आरपीएल, मर्चेंडाइजर, डॉक्यूमेंटेशन एग्जीक्यूटिव, आईटी हेल्प डेस्क अटेंडेंट, सेल्फ-एम्प्लॉयड टेलर, पैटर्न मास्टर और फैशन क्लोदिंग प्रोडक्शन जैसे कोर्स शामिल हैं।
400 रुपये प्रतिदिन स्टाइपेंड
प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को 400 रुपये प्रतिदिन स्टाइपेंड, भोजन और मुफ्त टूल किट दी जाएगी। खास बात यह है कि हर प्रशिक्षित कारीगर को ई-कैटलॉग प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिससे उनके उत्पादों को ऑनलाइन बाजार मिलेगा। सरकार के मुताबिक बोर्ड के 43 साल के इतिहास में यह पहला बड़ा कौशल कार्यक्रम है, जिसे कानून के तहत औपचारिक रूप से लागू किया जा रहा है।
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