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उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर में नई दर से टैक्स वसूली का रास्ता साफ हो गया है। बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम सर्किल रेट के अनुसार हाउस टैक्स में बढ़ोत्तरी से संबंधित याचिका पर फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि गाजियाबाद नगर निगम द्वारा टैक्स की दरों एवं वर्गीकरण को लेकर जो नियम बनाया गया है वह सही है। सबकुछ नियमानुसार हुआ है। ऐसे में नई दर से टैक्स वसूले जाने की प्रक्रिया को रोकने या गलत ठहराने का कोई वाजिब कारण नहीं है। हाईकोर्ट ने टैक्स बढ़ोत्तरी के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट का यह फैसला गाजियाबाद नगर निगम को आर्थिक रूप से संपन्न और स्वाबलंबी बनाने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
विदित हो कि देश की राजधानी दिल्ली के नजदीक स्थित गाजियाबाद में हाउस टैक्स की दर काफी कम है। सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के कई अन्य नगर निगम के मुकाबले भी गाजियाबाद में टैक्स की दर कम है। शहरवासी अच्छी सुविधा चाहते हैं। यही वजह है कि जब गाजियाबाद नगर निगम ने हाउस टैक्स बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया तो जनता ने इस पर कोई एतराज नहीं जताया।

हाउस टैक्स बढ़ोत्तरी का भले ही जनता ने कोई विरोध नहीं किया, लेकिन इस मुद्दे पर राजनैतिक विरोध खूब हुआ। शासन के निर्देशों के क्रम में हाउस टैक्स बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया गया था। टैक्स बढ़ोत्तरी में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया कि गरीब और कमजोर वर्ग पर कोई अतिरिक्त बोझ ना पड़े। इसके लिए कॉलोनी को पॉश, मध्यम और मलिन श्रेणी में बांट कर वहां पर डीएम सर्किल रेट के हिसाब से टैक्स की गणना की गई। कुछ वर्ष पूर्व तक गाजियाबाद नगर निगम कर्ज और आर्थिक देनदारियों के बोझ तले दबा हुआ था। विकास कार्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त फंड नहीं था। ऐसे में नगर निगम को स्वाबलंबी बनाने के लिए टैक्स बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया गया। गौर करने वाली बात यह भी है कि लंबे समय से टैक्स की दरें नहीं बढ़ी थी। ऐसे में आम लोगों ने नई दर से टैक्स जमा करना भी शुरू कर दिया। बड़े व्यापारिक और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा नई दर से टैक्स का भुगतान नहीं किया जा रहा था। ऐसे में हाईकोर्ट के फैसले के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है।
क्या कहता है अधिनियम
उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 207 में कहा गया है कि नगर आयुक्त समय-समय पर नियमावली में विहित रीति के अनुसार नगर या उसके किसी भी भाग की क्षेत्रवार किराया दर और निर्धारण सूची तैयार कराएंगे। 174 “ख” एवं उ०प्र० नगर निगम सम्पत्तिकर नियमावली 2000 के प्रस्तर 4 “क” एवं “ख” में दिये गये प्राविधानों के क्रम में न्यूनतम मासिक किराये की दरों को लागू कराये जाने का प्राविधान है।

14 वर्ष बाद की गई बढ़ोत्तरी
नगर निगम गाजियाबाद द्वारा वर्ष 2001 में हाउस टैक्स की दरों का निर्धारण किया गया था। जिसे वित्तीय वर्ष 01.04.2001 से लागू किया गया। वर्ष 2001 में निर्धारित स्व:कर की आवासीय दरें लागू होने के 14 वर्ष तक यानि 31.03.2015 तक हाउस टैक्स की दरों में कोई वृद्धि नही की गयी। पूर्व की दरें श्रेणीवार न होकर सम्पूर्ण गाजियाबाद सीमान्तर्गत एकसमान थी। ऐसे में पॉश कॉलोनी में जो टैक्स की दरें थी वही दरें मलिन बस्ती क्षेत्रों में भी लागू थी।

सुनील कुमार राय
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी

हाईकोर्ट का फैसला सर्वोपरि है। हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार टैक्स वसूली की कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद सभी चीजें स्पष्ट हो गई है। जिन लोगों ने अभी तक हाउस टैक्स जमा नहीं कराया है। उन सभी लोगों से अपील है कि वह जल्द से जल्द टैक्स जमा करायें। 28 फरवरी तक टैक्स में छूट मिल रहा है। ऐसे में सभी लोग 28 फरवरी से पहले टैक्स जमा कराकर छूट का लाभ हासिल करें।
सुनील राय
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी

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