Image Slider

होमताजा खबरदेश15 नहीं अब 30 लाख दोगे! अकेले बच्चे पालने वाली मां के हक में हाईकोर्ट का फैसला

Last Updated:

तेलंगाना हाईकोर्ट ने 28 साल पुराने वैवाहिक विवाद में गुजारा भत्ता डबल करते हुए पत्नी को 15 लाख रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने माना कि मां ने अकेले बच्चों की परवरिश की, इसलिए निचली अदालत का पूर्व फैसला अपर्याप्त था. 17.5 साल से अलग रह रहे इस जोड़े का तलाक मानसिक क्रूरता के आधार पर बरकरार रखा गया है. पति को अब तीन महीने में यह भुगतान करना होगा.

ख़बरें फटाफट

15 नहीं अब 30 लाख दोगे! अकेले बच्चे पालने वाली मां के हक में हाईकोर्ट का फैसलाZoom

कोर्ट ने सख्‍त रुख अख्तियार किया. (AI Image)

साल 1998, जब एक अरेंज मैरिज के साथ दो जिंदगियां एक डोर में बंधी थीं. किसी ने नहीं सोचा था कि 28 साल बाद इस रिश्ते का अंत अदालती गलियारों में ‘स्थायी गुजारा भत्ते’ की जद्दोजहद के साथ होगा. यह कहानी है उस कड़वाहट की जिसमें 17.5 साल तक पति-पत्नी एक-दूसरे से अलग रहे, आरोपों की बौछार हुई और बच्चों का भविष्य मां के कंधों पर टिका रहा. हैदराबाद की एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट ने अब एक ऐसा फैसला सुनाया है जो न केवल कानूनी बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी बेहद अहम है. कोर्ट ने साफ कर दिया कि अगर मां ने अकेले बच्चों को पाला है तो पिता अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ सकता.

डबल हुआ गुजारा भत्‍ता
जस्टिस के. लक्ष्मण और जस्टिस वकीति रामकृष्ण रेड्डी की खंडपीठ ने निचली अदालत के 2015 के फैसले को आंशिक रूप से बदलते हुए महिला के पक्ष में बड़ा आदेश दिया. कोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि वह ‘फुल एंड फाइनल सेटलमेंट’ के तौर पर पत्नी को 15 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान करे. बता दें कि निचली अदालत ने पहले ही 15 लाख रुपये देने का आदेश दिया था जिसे महिला ने ‘अपर्याप्त’ बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. अब पति को कुल 30 लाख रुपये की राशि चुकानी होगी.

बच्चों की परवरिश का आधार
अदालत ने अपने फैसले में इस बात को विशेष महत्व दिया कि दंपति के दो बच्चे (अब 26 और 23 वर्ष) अपनी मां के साथ रहे और उन्हीं के द्वारा पाले गए. कोर्ट ने माना कि निचली अदालत द्वारा तय किया गया गुजारा भत्ता बच्चों की शिक्षा और परवरिश के संघर्ष को देखते हुए कम था. हाईकोर्ट ने पुरुष को यह राशि देने के लिए तीन महीने का समय दिया है.

क्रूरता और आरोपों का लंबा सिलसिला
यह कानूनी लड़ाई 2015 में तब शुरू हुई जब रंगा रेड्डी जिला परिवार न्यायालय ने क्रूरता के आधार पर तलाक की डिक्री जारी की थी. पति का आरोप था कि पत्नी ने उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, झूठे मुकदमों की धमकी दी और नौकरी छोड़कर हैदराबाद बसने का दबाव बनाया. वहीं, पत्नी ने पति पर उत्पीड़न और बच्चों की अनदेखी के आरोप लगाए थे. हाईकोर्ट ने नोट किया कि हालांकि पति ने ‘परित्याग’ (Desertion) के आधार पर तलाक मांगा था लेकिन कानूनी समय सीमा (2 साल) पूरी होने से पहले ही याचिका दाखिल कर दी गई थी. फिर भी 17 साल से अलग रहने और रिश्तों में आई अत्यधिक कड़वाहट को देखते हुए अदालत ने मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक को बरकरार रखा और वित्तीय न्याय सुनिश्चित किया.

सवाल-जवाब
तेलंगाना हाई कोर्ट ने गुजारा भत्ते की राशि क्यों बढ़ाई?

कोर्ट ने माना कि मां ने अकेले ही दोनों बच्चों (26 और 23 साल) की परवरिश की है, इसलिए निचली अदालत द्वारा तय 15 लाख रुपये अपर्याप्त थे.

तलाक का मुख्य आधार क्या रहा?

अदालत ने ‘मानसिक क्रूरता’ और रिश्तों के पूरी तरह टूट जाने (Irretrievable Breakdown) को तलाक का आधार माना.

पति को अतिरिक्त राशि चुकाने के लिए कितना समय मिला है?

हाई कोर्ट ने पति को अतिरिक्त 15 लाख रुपये का भुगतान करने के लिए तीन महीने का समय दिया है.

About the Author

authorimg

Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||