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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार को भारत और अन्य देशों के बीच बातचीत बढ़ाने के लिए 64 पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप्स (PFG) बनाए हैं। 18वीं लोकसभा के तहत गठित ग्रुप्स में अलग-अलग पार्टियों के लोकसभा और राज्यसभा सांसद शामिल हैं। इसमें हर देश के लिए एक ग्रुप लीडर और 10 सदस्य हैं। भाजपा के सबसे ज्यादा 28 ग्रुप लीडर हैं। कांग्रेस के 9, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 3-3 सांसद ग्रुप लीडर बनाए गए हैं। ग्रुप लीडर में कांग्रेस सांसद शशि थरूर और TMC सांसद अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर PFG की जानकारी दी। उन्होंने 64 देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले ग्रुप लीडर और बाकी सदस्यों की लिस्ट जारी की। रिजिजू ने पोस्ट में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद PM मोदी ने भारत और अन्य देशों के बीच संवाद बढ़ाने के लिए पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप्स बनाने का प्रस्ताव दिया था। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गठन किया है। ऑपरेशन सिंदूर : 59 सदस्यों का डेलिगेशन 33 देशों में गया था केंद्र सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनियाभर में भारत का पक्ष रखने के लिए 17 मई 2025 को 59 सदस्यों वाले डेलिगेशन की घोषणा की थी। इसमें 51 नेता और 8 राजदूत थे। NDA के 31 और 20 दूसरे दलों के नेता थे, जिसमें 3 कांग्रेस नेता भी थे। ये डेलिगेशन दुनिया के 33 देशों, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सदस्य देशों में गया और वहां ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत का पक्ष रखा। इस डेलिगेशन को 7 ग्रुप में बांटा गया था। हर ग्रुप में एक सांसद को लीडर बनाया गया। प्रत्येक ग्रुप 8 से 9 सदस्य थे। इनमें 6-7 सांसद, सीनियर लीडर (पूर्व मंत्री) और राजदूत शामिल थे। 7 डेलिगेशन ने दुनिया को 5 संदेश दिए आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस : इसमें बताया कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकी गुटों और उनके ढांचों के खिलाफ था। आतंकी अड्‌डों को नपी-तुली कार्रवाई में निशाना बनाया गया। पाक सेना ने इसे खुद के खिलाफ हमला माना और पलटवार किया। पाक आतंक का समर्थक : सांसद कुछ सबूत लेकर गए, जिनमें उन्होंने बताया कि पहलगाम हमले में पाक समर्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) की भूमिका थी। इससे पहले हुए हमलों का भी पूरा चिट्‌ठा सांसद लेकर गए थे। भारत जिम्मेदार और संयमित : भारत ने सैन्य कार्रवाई में भी जिम्मेदारी और संयम का परिचय दिया। यह सुनिश्चित किया कि पाक के किसी निर्दोष नागरिक की जान न जाए। पाक ने कार्रवाई रोकने का जब आग्रह किया तो भारत ने उसे तत्परता से स्वीकारा। आतंक के खिलाफ विश्व एकजुट हो : सांसद ने इन देशों से आतंकवाद के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने और इससे निपटने के लिए सहयोग व समर्थन की मांग की। अपील की कि भारत-पाक के विवाद को आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के तौर पर देखें। पाक को लेकर हमारी नीति : यह बताया कि पाक के खिलाफ भारत ने अपना बदला हुआ दृष्टिकोण उजागर किया है। भारत सीमा पार से पैदा होने वाले खतरे को लेकर उदासीन रहने के बजाए प्रो-एक्टिव रवैया अपनाएगा और आतंकी हमलावरों को पहले ही निष्क्रय करेगा। ———————

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