बिहार के पूर्वी चंपारण से एक ऐसे युवा संत की प्रेरक कहानी सामने आई है, जिन्होंने कम उम्र में आध्यात्मिक जगत में ऊंचा स्थान हासिल किया. यह कहानी स्वामी रविशंकर गिरी की है, जो मात्र 32 वर्ष की आयु में जूना अखाड़ा के सबसे कम उम्र के महामंडलेश्वर बने. उनकी प्रारंभिक शिक्षा मोतिहारी में हुई, फिर उच्च शिक्षा के लिए प्रयागराज और कोटा गए तथा इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. बचपन से भगवान भोलेनाथ में आस्था रखने वाले स्वामी जी ने पारिवारिक परंपरा निभाते हुए संन्यास लिया. 2021 में कोविड काल के दौरान जनसेवा के लिए उनका नाम World Book of Records में दर्ज हुआ.
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